जामताड़ा: यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के विरोध में गुरुवार को जामताड़ा गांधी चौक पर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की ओर से एक घंटे का उपवास कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में चैंबर के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में व्यापारी शामिल हुए.


व्यापारियों ने हाथों में विभिन्न स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर प्रस्तावित MDR का विरोध किया और केंद्र सरकार से इसे वापस लेने की मांग की. चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने कहा कि 0.4 प्रतिशत MDR लागू होने की स्थिति में व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है.
उन्होंने कहा कि व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. बड़ी संख्या में लोग यूपीआई के माध्यम से भुगतान कर रहे हैं और व्यापारिक प्रतिष्ठान डिजिटल लेनदेन के प्रमुख माध्यमों में शामिल हैं.
व्यापारियों ने अतिरिक्त लागत को लेकर जताई चिंता
संजय अग्रवाल ने कहा कि यूपीआई भुगतान पर MDR लागू होने से व्यापारियों के खर्च में वृद्धि हो सकती है. उनके अनुसार इसका असर खासकर छोटे और मध्यम कारोबारियों पर पड़ सकता है.
उन्होंने कहा कि व्यापारी ऐसे किसी भी निर्णय का विरोध करेंगे, जिससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बजाय उस पर अतिरिक्त लागत का बोझ पड़े.
सरकार की ओर से 15 सितंबर को घोषित ढांचे के अनुसार, चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) यूपीआई लेनदेन में ₹2,000 से अधिक की राशि पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा. सरकार ने स्पष्ट किया है कि Person-to-Person (P2P) भुगतान और ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे.
सुप्रीम कोर्ट में याचिका, 15 अक्टूबर से लागू होना तय
MDR के मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. 28 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, जबकि केंद्र सरकार, RBI और NPCI से जवाब मांगा गया है. नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने वाली है.
चैंबर अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने कहा कि यदि 15 अक्टूबर से पहले 0.4 प्रतिशत MDR संबंधी प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया, तो व्यापारी यूपीआई भुगतान को लेकर आगे की रणनीति तय करने के लिए बाध्य होंगे.
उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर को प्रस्तावित UPI Transaction Day फिलहाल स्थगित कर दिया गया है. उनके अनुसार, कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के प्रतिनिधिमंडल की वित्त मंत्री के साथ हुई बैठक में MDR के मुद्दे पर विचार करने का आश्वासन दिया गया है.
फतेहपुर चैंबर ने भी जताया विरोध
फतेहपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष अरविंद मंडल ने भी प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत MDR का विरोध किया. उन्होंने कहा कि MDR लागू होने से व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है.
उन्होंने सरकार से प्रस्ताव वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए व्यापारियों पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए.
स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर व्यापारियों ने जताया विरोध
कार्यक्रम के दौरान व्यापारियों ने ‘MDR वापस लो’ सहित विभिन्न स्लोगन लिखे बोर्ड प्रदर्शित किए. एक घंटे के उपवास के माध्यम से व्यापारियों ने अपनी एकजुटता दिखाई और प्रस्तावित MDR के खिलाफ विरोध दर्ज कराया.
वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि MDR सरकार या NPCI द्वारा वसूला जाने वाला कर नहीं है और नई व्यवस्था का उद्देश्य UPI इकोसिस्टम की संचालन लागत तथा दीर्घकालिक स्थिरता को समर्थन देना है. सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत P2M UPI लेनदेन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे.
रिपोर्ट: मनीष वर्णवाल

