जामताड़ा: सदर अस्पताल जामताड़ा में दो लावारिस शव पिछले कई दिनों से अंतिम संस्कार के इंतजार में पड़े हैं. एक शव आठ दिनों से अस्पताल में है, जबकि दूसरे की मौत तीन दिन पहले हो चुकी है. हैरानी की बात यह है कि एक मृतका के परिजनों का पता होने के बावजूद वे शव ले जाने से इनकार कर रहे हैं. दूसरी ओर, अस्पताल प्रबंधन अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी प्रशासन पर डाल रहा है, जबकि पुलिस प्रशासन भी इस मामले में असमंजस की स्थिति में नजर आ रहा है.


20 अगस्त को हुई थी सोहादी मरांडी की मौत
मिहिजाम के कांगोई निवासी सोहादी मरांडी की 20 अगस्त को सदर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी. अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों से संपर्क करने के लिए 9931338001 और 6205081580 नंबरों पर फोन किया. शुरुआत में परिजनों की ओर से आनाकानी की गई, बाद में फोन उठाना भी बंद कर दिया गया. स्थानीय लोगों से संपर्क करने पर पता चला कि सोहादी मरांडी के परिजन अपना घर छोड़कर कहीं अन्यत्र चले गए हैं. इसके बाद से शव अस्पताल में ही पड़ा है.
सड़क किनारे मिला था दूसरा शव

दूसरा शव एक वृद्ध व्यक्ति का है, जिसकी पहचान अब तक नहीं हो सकी है. 19 अगस्त की रात करीब आठ बजे वह सड़क किनारे घायल अवस्था में लावारिस पड़ा मिला था. पुलिस के सहयोग से 108 एंबुलेंस से उसे सदर अस्पताल लाया गया. चेहरे पर हल्की चोट थी, जिसकी ड्रेसिंग की गई. रात करीब 10 बजे उसे मेल वार्ड में भर्ती किया गया और अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर में रखा गया. इलाज के दौरान 23 अगस्त को उसकी मौत हो गई. मौत के बाद से यह शव भी पहचान और अंतिम संस्कार के इंतजार में है.
अस्पताल ने कहा- लावारिस शव का अंतिम संस्कार हमारी जिम्मेदारी नहीं
सदर अस्पताल प्रबंधन ने दोनों शवों के संबंध में पुलिस को सूचना देने की बात कही है. अस्पताल प्रबंधक विनित कुमार ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से जामताड़ा पुलिस को सूचना दे दी गई है. उन्होंने कहा कि लावारिस शवों का अंतिम संस्कार अस्पताल प्रबंधन द्वारा नहीं कराया जाता है.

पुलिस ने रिम्स का हवाला देकर उठाया सवाल
इधर, पुलिस प्रशासन का कहना है कि रिम्स रांची में लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराया जाता रहा है, तो सदर अस्पताल स्तर पर भी इस दिशा में पहल की जा सकती है. पुलिस के अनुसार दोनों शवों के संबंध में बुधवार को लिखित रूप से सूचना दी गई है. पुलिस ने दोनों शवों का अंतिम संस्कार कराने का प्रयास करने की बात कही है.
आठ दिन से शव पड़ा, फिर भी नहीं निकला समाधान
सबसे गंभीर सवाल यह है कि एक शव अस्पताल में आठ दिनों से पड़ा हुआ है और दूसरे की मौत के बाद भी तीन दिन बीत चुके हैं। इसके बावजूद अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी को लेकर अस्पताल और प्रशासन के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है. लावारिस शवों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए स्पष्ट व्यवस्था नहीं होने से मानवीय संवेदनाओं के साथ-साथ प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

