जमशेदपुर: झारखंड संयुक्त युवा संघ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी किए गए नए समानता और समावेशिता से जुड़े दिशा- निर्देशों पर गंभीर आपत्ति जताई है. संगठन की ओर से इस संबंध में प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा गया. संघ का कहना है कि प्रस्तावित शिकायत निवारण समितियों के प्रावधान सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों में असुरक्षा और भय का माहौल पैदा कर सकते हैं. विशेष रूप से त्वरित कार्रवाई यानी फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के तहत शिकायतों के निपटारे में प्रारंभिक जांच के लिए कोई स्पष्ट और पारदर्शी मानक तय नहीं किए गए हैं.

संयुक्त युवा संघ ने आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया में स्पष्ट दिशा- निर्देशों के अभाव में नियमों के दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है. इससे निर्दोष छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई का खतरा बना रह सकता है. संगठन ने कहा कि ऐसी व्यवस्था प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन कर सकती है.
संघ के अनुसार इन दिशा- निर्देशों से अकादमिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आज़ादी और मेधा आधारित शिक्षा प्रणाली पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है. संगठन ने मांग की कि UGC के तहत गठित होने वाली शिकायत निवारण समितियां पूरी तरह संतुलित और निष्पक्ष हों.
संयुक्त युवा संघ ने झूठी और दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर दंडात्मक कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान करने, द्वि-स्तरीय जांच प्रक्रिया को अनिवार्य बनाने और सामान्य वर्ग के छात्रों व शिक्षकों को भी समान कानूनी संरक्षण देने की मांग की है.

