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जामताड़ा: हूल दिवस के अवसर पर मंगलवार को जामताड़ा प्रखंड के अमलाबनी रामपुर चौक टोला स्थित सिद्धू-कान्हू चौक में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने कहा कि आदिवासी और मूलवासी समाज के अस्तित्व तथा जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए झारखंड में एक बार फिर “हूल क्रांति” की आवश्यकता है.
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समारोह को संबोधित करते हुए चंपई सोरेन ने आरोप लगाया कि संताल परगना सहित पूरे राज्य में आदिवासियों की जमीनों पर लगातार अवैध कब्जे हो रहे हैं, लेकिन वर्तमान गठबंधन सरकार इस गंभीर मुद्दे पर मूकदर्शक बनी हुई है. उन्होंने कहा कि हूल दिवस झारखंड के इतिहास का गौरवशाली दिन है, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वीर शहीद सिदो मुर्मू, कान्हू मुर्मू, चांद मुर्मू, भैरव मुर्मू, फूलो मुर्मू और झानो मुर्मू की जन्मस्थली भोगनाडीह में ग्रामीणों द्वारा आयोजित कार्यक्रम को सरकार ने रोक दिया.
उन्होंने आरोप लगाया कि भोगनाडीह को पुलिस छावनी में तब्दील कर 51 मजिस्ट्रेटों की तैनाती की गई है. सरकार जनता में भय का वातावरण बनाकर हूल दिवस के गौरवशाली इतिहास को दबाने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि इसी भोगनाडीह की धरती से अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हूल क्रांति का बिगुल फूंका गया था, जिसके परिणामस्वरूप संताल परगना की पहचान बनी और संथाल परगना टेनेंसी (एसपीटी) एक्ट अस्तित्व में आया.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड राज्य गठन के बाद भी एसपीटी एक्ट का प्रभावी ढंग से पालन नहीं किया गया. इसके कारण आदिवासी समाज स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहा है. उन्होंने दावा किया कि केवल पाकुड़ जिले में ही 15 हजार एकड़ से अधिक आदिवासी भूमि पर अवैध कब्जा हो चुका है, जबकि पूरे संताल परगना और राज्य के अन्य हिस्सों में भी ऐसी ही स्थिति बनी हुई है.
चंपई सोरेन ने यह भी आरोप लगाया कि रिम्स-2 परियोजना के लिए नगरी क्षेत्र में ग्रामसभा की अनुमति के बिना जबरन जमीन की घेराबंदी की जा रही है. उन्होंने कहा कि आदिवासियों की हड़पी गई एक-एक इंच जमीन वापस दिलाई जाएगी. पूर्वजों ने तीर-धनुष के बल पर ब्रिटिश शासन को झुकने पर मजबूर किया था और अब जनता लोकतांत्रिक तरीके से अन्याय का जवाब देगी.
इससे पूर्व आदिवासी सवता सुसार अखाड़ा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि चंपई सोरेन ने सिद्धू-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की. इसके बाद ग्रामीणों ने आदिवासी परंपरा के अनुसार उनका पारंपरिक एवं भव्य स्वागत किया.
कार्यक्रम में मंगल सोरेन, उत्तम हेम्ब्रम, सोनमुनि हेम्ब्रम, बीता हांसदा, सुनील हांसदा, मुखिया निर्मला सोरेन, दारा सिंह हेम्ब्रम, लालेश हेम्ब्रम, अर्जुन सोरेन, सुखेंद्र टुडू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.