चांडिल/ Vikash Thakur लोकआस्था और पवित्रता के प्रतीक छठ महापर्व का आयोजन सोमवार को पूरे चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में हर्ष और श्रद्धा के माहौल में किया गया. गांवों से लेकर नगर तक नदियों, तालाबों और जलाशयों पर भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा.

व्रती महिलाओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर सूर्यदेव और छठी मैया से परिवार की सुख- शांति, समृद्धि और संतान की दीर्घायु की कामना की. मंगलवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ यह चार दिवसीय व्रत विधिपूर्वक संपन्न होगा.

तिरूलडीह के घाटों पर उमड़ी आस्था की भीड़
शाम ढलते ही स्वर्णरेखा नदी के तिरूलडीह घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. पीले परिधान में सजी महिलाएं सूप, दौरा, डाला और प्रसाद की टोकरी लेकर अपने परिजनों के साथ घाटों की ओर रवाना हुईं.
रास्तों में छठ गीतों की गूंज, दीपों की रोशनी और सजे हुए पंडालों से माहौल भक्तिमय हो उठा. स्थानीय युवाओं और समितियों ने घाटों की सफाई, सजावट और प्रकाश व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाई. प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे.

सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर होगा समापन
मंगलवार की सुबह व्रती महिलाएं सूर्योदय से पहले घाटों पर पहुंचेंगी और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करेंगी. इसके बाद 36 घंटे के निर्जला उपवास के पारण के साथ व्रत पूरा होगा. पारण के दौरान व्रती महिलाएं परिवार और पड़ोसियों के बीच प्रसाद का वितरण करेंगी.
गीतों और भक्ति से गूंजा वातावरण
पूरे चांडिल क्षेत्र में सोमवार की शाम से ही छठी मैया के गीतों की मधुर ध्वनि गूंजने लगी. दीपों की रोशनी से घाट जगमगा उठे. बच्चों ने दीप जलाकर और पटाखे छोड़कर माहौल को और भी रौनकदार बना दिया. जगह-जगह सामाजिक संस्थाओं और युवा समितियों की ओर से भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया.

