आदित्यपुर: नगर निगम इन दिनों एक अनोखी पहेली का केंद्र बना हुआ है. मामला मृत्यु प्रमाण पत्र का है, लेकिन सवालों की सूची इतनी लंबी है कि उसका भी अलग से प्रमाण पत्र जारी करना पड़ सकता है.


कहानी शुरू होती है 4 हजार रुपये की कथित रिश्वत मांगने के आरोप से. शिकायत हुई, हंगामा हुआ, विरोध प्रदर्शन हुआ. इसके बाद घटनाक्रम भी तेजी से आगे बढ़ा. जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र शाखा की जिम्मेदारी संभाल रहीं उपनगर आयुक्त पारुल सिंह ने प्रभार छोड़ दिया और संबंधित कर्मी रविंद्र राम को भी शाखा से हटा दिया गया.
लेकिन यहां असली कहानी शुरू होती है. जिस आरोप को लेकर इतना बवाल हुआ, उसकी जांच हुई या नहीं ? अगर हुई तो नतीजा क्या निकला ? और अगर नहीं हुई तो फिर कार्रवाई किस आधार पर हुई ? यह सवाल अब जनता पूछ रही है.
नगर निगम के गलियारों में चर्चा है कि यहां आरोपों की फाइलें शायद किसी ऐसे कमरे में रखी जाती हैं, जहां जाने का रास्ता तो होता है, लेकिन वापस आने का नहीं. शिकायत आई, जिम्मेदारी बदली, कर्मी हटे, लेकिन जांच की रिपोर्ट अब भी रहस्य बनी हुई है.
लोग तंज कस रहे हैं कि अगर किसी पर आरोप लगे तो जांच से पहले ही कुर्सियां बदल जाती हैं, लेकिन सच्चाई की फाइल शायद छुट्टी पर चली जाती है. सवाल यह भी है कि यदि आरोप गलत थे तो संबंधित कर्मी को हटाया क्यों गया ? और यदि आरोप सही थे तो फिर आगे की कार्रवाई कहां है ?फिलहाल आदित्यपुर नगर निगम में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र से ज्यादा चर्चा अब इस बात की हो रही है कि आखिर इस पूरे मामले में ‘सच’ का प्रमाण पत्र कब जारी होगा.
Edited By Sarita Mahato

