सरायकेला: गम्हरिया थाना परिसर में महिला के साथ कथित दुष्कर्म के गंभीर मामले के बाद पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गीयारी ने जिले के सभी थानों के लिए महिलाओं की सुरक्षा और शिकायतों के निपटारे को लेकर विस्तृत दिशा- निर्देश जारी किए हैं. सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह है कि किसी शिकायतकर्ता महिला को थाने में रखने अथवा किसी महिला आरोपी को गिरफ्तार करने की स्थिति में महिला पुलिस पदाधिकारी या महिला कर्मी की मौजूदगी सुनिश्चित करनी होगी. महिला पुलिसकर्मी उपलब्ध नहीं होने पर किसी भी परिस्थिति में महिला को थाने में नहीं रखा जाएगा.


सोमवार को जारी आदेश सभी थाना प्रभारियों, अंचल निरीक्षकों और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों को संबोधित है. इसमें महिलाओं से सम्मानजनक व्यवहार, शिकायत दर्ज करने, पूछताछ, गिरफ्तारी, गोपनीयता और थानों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं.
गम्हरिया में सुरक्षा और निगरानी की चूक का आदेश में जिक्र
आदेश में गम्हरिया प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि 29-30 अक्टूबर की रात पति द्वारा मारपीट किए जाने की सूचना के बाद गश्ती दल महिला को थाना लेकर आया था. उस समय महिला पुलिसकर्मी उपलब्ध नहीं थी.
एसपी ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा की अपेक्षा से थाना पहुंची महिला की देखरेख और निगरानी की जिम्मेदारी वहां मौजूद पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों की थी. इसके बावजूद वायरलेस ऑपरेटर नीरज लकड़ा पर कथित दुष्कर्म का आरोप सामने आया. आदेश में संबंधित पुलिसकर्मियों के आचरण से पुलिस की छवि धूमिल होने की बात कही गई है.
महिला की शिकायत धैर्य से सुनना होगा
एसपी ने निर्देश दिया है कि थाने पहुंचने वाली प्रत्येक महिला के साथ सम्मानजनक और शालीन व्यवहार किया जाए. उसकी शिकायत धैर्यपूर्वक सुनी जाए और अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दिया जाए. किसी भी परिस्थिति में उसे अपमानित, प्रताड़ित, भयभीत या शिकायत करने से हतोत्साहित नहीं किया जाए.
यौन अपराध से जुड़े मामलों में शिकायत सुनने और आवश्यक कार्रवाई में महिला पुलिस पदाधिकारी की भूमिका सुनिश्चित करने को कहा गया है. महिला की शिकायत यथासंभव उसी की भाषा में दर्ज करने का भी निर्देश है.
क्षेत्राधिकार के नाम पर नहीं लौटेगी शिकायत, जरूरत पर Zero FIR
आदेश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा FIR दर्ज करने से जुड़ा है. किसी महिला की शिकायत से संज्ञेय अपराध सामने आता है तो क्षेत्राधिकार का हवाला देकर प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार नहीं किया जाएगा. आवश्यकता पड़ने पर Zero FIR दर्ज कर मामला संबंधित थाने को भेजा जाएगा. शिकायतकर्ता को प्राथमिकी की प्रति भी नियमानुसार निःशुल्क उपलब्ध करानी होगी.
न रातभर रोकेंगे, न समझौते के लिए बनाएंगे दबाव
महिला आरोपी अथवा पीड़िता से पूछताछ के दौरान महिला पुलिस पदाधिकारी की मौजूदगी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले महिला की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी.
महिलाओं को बिना उचित कारण बार-बार थाने बुलाने, अनावश्यक इंतजार कराने और शिकायत से असंबंधित निजी सवाल पूछने पर भी रोक लगाई गई है. किसी पीड़िता पर जबरन समझौते का दबाव नहीं बनाया जाएगा और केवल पूछताछ के उद्देश्य से किसी महिला को रातभर थाने में नहीं रोका जाएगा. थानों में महिलाओं के लिए बैठने की उचित जगह, पेयजल, शौचालय और गोपनीयता की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी.
मोबाइल नंबर से फोटो तक रखना होगा सुरक्षित
एसपी ने महिलाओं की निजता को लेकर भी सख्त निर्देश दिए हैं. महिला का मोबाइल नंबर, पता, फोटो और अन्य व्यक्तिगत विवरण सुरक्षित रखना होगा. जिन मामलों में कानून पीड़िता की पहचान की रक्षा करता है, उनमें उसकी पहचान मीडिया या किसी अनधिकृत व्यक्ति के साथ साझा नहीं की जाएगी.
सभी थाना प्रभारियों और पर्यवेक्षण अधिकारियों को पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी SOP एवं अन्य दिशा-निर्देशों से अधीनस्थ पुलिसकर्मियों को अवगत कराने और उनका सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी दी गई है.
गम्हरिया प्रकरण के बाद जारी यह आदेश स्पष्ट करता है कि जिला पुलिस अब केवल संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए थाना स्तर की व्यवस्था में भी बदलाव कर रही है.

