आदित्यपुर: नगर निगम के लिए कचरा प्रबंधन लगातार सिरदर्द बनता जा रहा है. वर्षों की कवायद और तमाम तकनीकी अड़चनों को दूर करने के बाद मिरूडीह में कचरा ट्रीटमेंट प्लांट तैयार तो हो गया, लेकिन अब इसके संचालन से पहले ही स्थानीय ग्रामीणों का भारी विरोध सामने आ गया है. बुधवार को यहां कचरा गिराने की शुरुआत होनी थी. निगम के अधिकारी, मेयर संजय सरदार, डिप्टी मेयर समेत करीब आधा दर्जन पार्षद भी मौके पर पहुंचे थे, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण शुरुआत नहीं हो सकी.


ग्रामीणों ने प्लांट की स्थापना की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए प्रशासन और नगर निगम से ग्रामसभा से संबंधित दस्तावेज दिखाने की मांग की. ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, ऐसे में यह स्पष्ट किया जाए कि किस प्रक्रिया और किसकी सहमति के आधार पर इतने बड़े भूभाग पर कचरा ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया.
ग्रामीणों का सीधा सवाल- ग्रामसभा हुई तो दस्तावेज दिखाइए
विरोध कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट लगाने से पहले न तो उनकी आपत्तियों का समाधान किया गया और न ही उन्हें ग्रामसभा अथवा वार्ड सभा से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए. ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए अब आगामी शनिवार को वार्ड सभा बुलाने का निर्णय लिया गया है.

यहीं से नगर निगम की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा होता है. यदि प्लांट के निर्माण से पहले आवश्यक ग्रामसभा अथवा अन्य वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी की गई थीं तो उनके दस्तावेज सार्वजनिक करने में परेशानी क्या है ? और यदि प्रक्रिया पहले पूरी हो चुकी है तो अब दोबारा वार्ड सभा बुलाने की नौबत क्यों आई ? इन सवालों का जवाब निगम प्रशासन को देना होगा.
मेयर बोले- फाइल मंगाकर कराएंगे जांच
मेयर संजय सरदार ने ग्रामीणों की आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि कचरा ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किस आधार पर किया गया, इससे संबंधित फाइल मंगाकर जांच कराई जाएगी. उन्होंने कहा कि स्थानीय ग्रामीणों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा.
मेयर का यह बयान अपने आप में महत्वपूर्ण है, क्योंकि करोड़ों रुपये की परियोजना तैयार होने के बाद यदि अब उसके निर्माण की प्रक्रिया से संबंधित फाइल की जांच की आवश्यकता पड़ रही है तो सवाल परियोजना की योजना और प्रशासनिक प्रक्रिया दोनों पर उठना स्वाभाविक है.
करोड़ों खर्च, फिर भी कचरा वहीं का वहीं
आदित्यपुर नगर निगम लंबे समय से कचरे के स्थायी निस्तारण की समस्या से जूझ रहा है. शहर से प्रतिदिन निकलने वाले कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए स्थायी व्यवस्था की जरूरत लगातार महसूस की जाती रही है. मिरूडीह का प्लांट इस समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा था, लेकिन संचालन शुरू होने से पहले ही स्थानीय विरोध ने पूरी योजना को नई चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है.
अब सवाल केवल मिरूडीह के ग्रामीणों के विरोध का नहीं है. सवाल यह भी है कि करोड़ों रुपये खर्च करने से पहले स्थानीय सहमति, सामाजिक प्रभाव और आवश्यक वैधानिक प्रक्रियाओं को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट क्यों नहीं की गई ? यदि सभी प्रक्रियाएं पूरी हुई हैं तो निगम को दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. यदि कोई प्रक्रिया बाकी है तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए.
फिलहाल मिरूडीह में कचरा गिराने की योजना विरोध में उलझ गई है. शनिवार की वार्ड सभा पर अब सबकी नजर रहेगी. वहां ग्रामीणों की आपत्तियों का समाधान निकलता है या करोड़ों की लागत से तैयार कचरा ट्रीटमेंट प्लांट संचालन के इंतजार में पड़ा रहता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा.

