ईचागढ़: विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन ईचागढ़ की राजनीति में इन दिनों एक अजीब-सी खामोशी के बीच शुगबुगाहट महसूस की जा रही है. चांडिल के चौक- चौराहों से लेकर कुकड़ू और ईचागढ़ के ग्रामीण इलाकों तक राजनीतिक बातचीत में एक सवाल बार- बार लौट रहा है- अगले विधानसभा चुनाव में ईचागढ़ का राजनीतिक समीकरण क्या होगा ?


चाय की दुकानों और कार्यकर्ताओं की बैठकी में चर्चा के केंद्र में तीन नाम हैं- मौजूदा विधायक सविता महतो, आजसू नेता हरेलाल महतो और पार्टी प्रमुख सुदेश कुमार महतो. लेकिन इनमें सबसे अधिक चर्चा हरेलाल महतो के अगले राजनीतिक कदम और सुदेश महतो को लेकर चल रही नई अटकलों की है.
2024 की हार के बाद भी हरेलाल बने रहे आजसू का प्रमुख चेहरा
पिछले विधानसभा चुनाव का गणित इन चर्चाओं की पृष्ठभूमि समझने के लिए महत्वपूर्ण है. 2024 में एनडीए के सीट बंटवारे में ईचागढ़ से आजसू के हरेलाल महतो उम्मीदवार थे. चुनाव परिणाम में झामुमो की सविता महतो ने 77,552 वोट हासिल किए, जबकि हरेलाल महतो 51,029 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे. जीत का अंतर 26,523 वोट रहा. तीसरे स्थान पर जेएलकेएम के तरुण महतो को 41,138 वोट मिले.
इससे पहले 2019 में भी हरेलाल दूसरे स्थान पर रहे थे. तब सविता महतो को 57,546, हरेलाल को 38,836 और भाजपा के साधु चरण महतो को 38,485 वोट मिले थे. वहीं 2014 में भाजपा के साधु चरण महतो ने यह सीट जीती थी. यानी पिछले तीन विधानसभा चुनावों का रिकॉर्ड बताता है कि ईचागढ़ में भाजपा, आजसू और झामुमो- तीनों की अलग- अलग राजनीतिक मौजूदगी रही है. यही इतिहास आज की चर्चाओं को और दिलचस्प बना रहा है.
कभी ‘हरेलाल भाजपा जाएंगे’, तो कभी उठता है नया सवाल
पिछले कुछ दिनों से स्थानीय राजनीतिक हलकों में हरेलाल महतो के भाजपा में जाने की अटकलें सुनाई दे रही हैं. लेकिन उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में ऐसी किसी राजनीतिक पारी बदलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है. खुद हरेलाल भी इन चर्चाओं पर फिलहाल विराम लगाने की कोशिश करते दिखाई देते हैं. उनका कहना है “बाहर क्या चर्चा है, ये बाहर वाले जानें. मैं आजसू का सिपाही था और हूं. भविष्य को मुझ पर छोड़िए.”
उनका यह बयान आजसू में बने रहने की मौजूदा स्थिति स्पष्ट करता है, लेकिन भविष्य को लेकर दरवाजा खुला छोड़ने वाली उनकी भाषा स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं को थमने भी नहीं देती.
अब चर्चा में सुदेश महतो का नाम
इसी बीच ईचागढ़ के राजनीतिक गलियारों में एक और चर्चा ने जगह बना ली है. आजसू के कुछ पुराने समर्थकों और स्थानीय राजनीतिक बैठकों में यह सवाल सुनाई पड़ रहा है कि क्या अगले विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रमुख सुदेश कुमार महतो स्वयं ईचागढ़ से मैदान में उतर सकते हैं ? फिलहाल इस चर्चा की पुष्टि आजसू की ओर से नहीं हुई है. सुदेश महतो अथवा पार्टी ने ईचागढ़ से उनकी उम्मीदवारी की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है. इसलिए इसे अभी स्थानीय राजनीतिक अटकल से अधिक नहीं माना जा सकता. लेकिन सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि यदि भविष्य में एनडीए का सीट बंटवारा फिर 2024 की तर्ज पर हुआ, तो ईचागढ़ में भाजपा और आजसू के बीच सीट तथा उम्मीदवार- दोनों को लेकर राजनीतिक दिलचस्पी स्वाभाविक रूप से बनी रहेगी. भविष्य का गठबंधन और सीट बंटवारा अभी तय नहीं है.
चौक- चौराहों की चर्चा और पार्टी का फैसला दो अलग बातें
ईचागढ़ में फिलहाल जो तस्वीर दिखाई देती है, उसमें अफवाहें और राजनीतिक गतिविधियां आधिकारिक फैसलों से काफी आगे चल रही हैं. एक तरफ हरेलाल महतो आजसू के साथ होने की बात स्पष्ट रूप से कह रहे हैं, दूसरी तरफ उनके अगले कदम पर चर्चा जारी है. इसी के समानांतर सुदेश महतो का नाम भी स्थानीय बातचीत में तैरने लगा है. इन चर्चाओं के बीच मौजूदा विधायक सविता महतो का पक्ष भी राजनीतिक समीकरण का अहम हिस्सा है. 2024 में उन्होंने लगातार दूसरी बार ईचागढ़ सीट जीती थी और पिछले चुनाव में उनकी जीत का अंतर 26 हजार से अधिक मतों का रहा. इसलिए 2029 को लेकर अभी किसी एक राजनीतिक तस्वीर को अंतिम मान लेना जल्दबाजी होगी.
फिलहाल सवाल ज्यादा, जवाब कम
ईचागढ़ की चाय दुकानों से निकल रही राजनीतिक चर्चाओं को अगर एक पंक्ति में समेटें तो फिलहाल यहां सवाल ज्यादा हैं और आधिकारिक जवाब कम.
• हरेलाल आजसू में ही रहेंगे या भविष्य में कोई नया राजनीतिक निर्णय लेंगे ?
• सुदेश महतो के नाम की चर्चा महज कार्यकर्ताओं की राजनीतिक गपशप है या आने वाले दिनों में इसका कोई ठोस आधार सामने आएगा ?
• और अगली बार ईचागढ़ सीट एनडीए में किस दल के हिस्से जाएगी ?
इनमें से किसी सवाल का जवाब अभी तय नहीं है. मगर इतना जरूर है कि चुनाव भले दूर हो, ईचागढ़ के चौक- चौराहों पर अगला चुनाव धीरे- धीरे बातचीत का हिस्सा बनने लगा है. यहां अभी कोई औपचारिक राजनीतिक घोषणा नहीं हुई है बस खामोशी के बीच सियासी आहटें सुनाई देने लगी हैं.
रिपोर्ट: विपिन वार्ष्णेय

