रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन और कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सोमवार को होने वाली आरोप गठन की कार्यवाही तकनीकी कारणों से टल गई. अब रांची की विशेष PMLA अदालत में 24 सितंबर 2026 को आरोप गठन के बिंदु पर अगली कार्यवाही होगी. सोमवार को सीएम हेमंत सोरेन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष उपस्थित होना था, लेकिन सर्वर संबंधी तकनीकी समस्या के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी.


यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है क्योंकि झारखंड हाईकोर्ट ने 18 सितंबर को हेमंत सोरेन की क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर राहत देने से इनकार कर दिया था. हाईकोर्ट के उपलब्ध आदेश के मुताबिक मामला ECIR Case No. 06/2023 से संबंधित है और इसकी सुनवाई AJC-I-cum-Special Judge, PMLA, Ranchi की अदालत में चल रही है.
सोमवार को क्या हुआ
विशेष PMLA अदालत ने इससे पहले हेमंत सोरेन को आरोप गठन की प्रक्रिया के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया था. सोमवार की कार्यवाही के दौरान उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जोड़ा जाना था, लेकिन तकनीकी गड़बड़ी के कारण यह संभव नहीं हो पाया. इसके बाद अदालत ने आरोप गठन के लिए 24 सितंबर की तारीख निर्धारित की.
रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने हेमंत सोरेन की ओर से दायर उस आवेदन को भी स्वीकार नहीं किया, जिसमें आगे की कार्यवाही को लेकर राहत मांगी गई थी. ED ने अदालत में कार्यवाही आगे बढ़ाने का पक्ष रखा.
क्या है बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन का मामला
मामले की शुरुआत रांची के बड़गाईं अंचल से संबंधित जमीन के दस्तावेजों में कथित हेरफेर की जांच से जुड़ी है. झारखंड हाईकोर्ट के 18 सितंबर के आदेश के अनुसार, 1 जून 2023 को सदर थाना कांड संख्या 272/2023 तत्कालीन बड़गाईं अंचल अधिकारी मनोज कुमार की शिकायत पर राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के खिलाफ दर्ज किया गया था. इसमें जालसाजी, धोखाधड़ी, चोरी और संबंधित अपराधों की धाराएं लगाई गई थीं. इसके बाद ED ने ECIR No. RNZO/25/2023 दर्ज कर PMLA के तहत जांच आगे बढ़ाई.
ED का आरोप है कि बड़गाईं के शांतिनगर क्षेत्र में करीब 8.86 एकड़ जमीन को फर्जी दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों में कथित हेरफेर और अन्य तरीकों से अवैध रूप से हासिल करने वाले नेटवर्क की जांच के दौरान सीएम हेमंत सोरेन से संबंधित साक्ष्य मिले. एजेंसी का दावा है कि यह जमीन 12 प्लॉटों में फैली है और सोरेन के कथित कब्जे एवं नियंत्रण में थी. ये अभियोजन पक्ष के आरोप हैं, जिन पर मुकदमे में अंतिम न्यायिक फैसला अभी नहीं हुआ है.
ED किन तथ्यों को बना रही आधार
हाईकोर्ट के फैसले में दर्ज ED के पक्ष के अनुसार जांच एजेंसी ने अप्रैल 2023 और फरवरी 2024 में जमीन का सर्वे कराया था. ED ने जमीन की घेराबंदी, वहां मौजूद लोगों के बयानों और राजस्व अभिलेखों से मिली सामग्री को अपने आरोपों के समर्थन में पेश किया है. एजेंसी ने बड़गाईं अंचल कार्यालय से कथित तौर पर मिले दस्तावेजों और भानु प्रताप प्रसाद से जब्त रिकॉर्ड को भी जांच का हिस्सा बनाया.
ED ने यह भी आरोप लगाया है कि जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और बाद में हुई प्रशासनिक कार्यवाही का इस्तेमाल जमीन से संबंध छिपाने के लिए किया गया. हेमंत सोरेन की ओर से इन आरोपों का विरोध किया गया है और उनके कानूनी पक्ष ने मुकदमे से मुक्त करने की मांग की थी. इसलिए ED के इन दावों को सिद्ध तथ्य के बजाय अदालत के समक्ष लंबित अभियोजन के आरोप के रूप में देखना जरूरी है.
डिस्चार्ज याचिका से हाईकोर्ट तक कैसे पहुंचा मामला
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विशेष PMLA अदालत में डिस्चार्ज आवेदन दाखिल कर अपने खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही समाप्त करने की मांग की थी. 8 जून 2026 को विशेष अदालत ने यह आवेदन खारिज कर दिया. इसके खिलाफ उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीज़न न. 982/2026 दाखिल किया.
हाईकोर्ट में उनकी ओर से एक अंतरिम आवेदन के जरिए आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग भी की गई थी. प्रमुख तर्कों में आवश्यक अभियोजन स्वीकृति से जुड़ा सवाल उठाया गया. ED ने इसका विरोध किया. हाईकोर्ट ने 16 सितंबर को मामले पर सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रखा और 18 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया. अदालत ने तत्काल राहत नहीं दी, जिसके बाद विशेष PMLA अदालत में आरोप गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ी.
अब 24 सितंबर क्यों महत्वपूर्ण
24 सितंबर की कार्यवाही में विशेष अदालत के सामने मुख्य मुद्दा आरोप गठन का रहेगा. आरोप तय होने का अर्थ यह नहीं होगा कि किसी आरोपी को दोषी ठहरा दिया गया है. चार्ज फ्रेमिंग मुकदमे का वह चरण है जिसमें अदालत यह तय करती है कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर किन आरोपों पर विधिवत ट्रायल चलाया जाएगा. इसके बाद अभियोजन को अपने आरोप साक्ष्यों के आधार पर साबित करने होते हैं और बचाव पक्ष को उन्हें चुनौती देने का अवसर मिलता है.
इसलिए सोमवार की कार्यवाही टलने से सीएम हेमंत सोरेन को मामले में कोई न्यायिक राहत मिलने या आरोप समाप्त होने जैसी स्थिति नहीं बनी है. फिलहाल केवल आरोप गठन की प्रक्रिया की तारीख बदलकर 24 सितंबर 2026 हुई है.

