सरायकेला: आमदा ओपी क्षेत्र के बड़ाबांबू चौक के पास बुधवार की देर रात हुई फायरिंग की घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी. रात करीब 1:20 बजे सार्वजनिक स्थान के पास गोली चलने और गाली- गलौज की सूचना पुलिस को मिली. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. लेकिन आधी रात हथियार के साथ फायरिंग की घटना ने आमदा ओपी क्षेत्र में पुलिस की गश्ती और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.


गुरुवार को सरायकेला थाना परिसर में सरायकेला अंचल के इंस्पेक्टर राजेश टुडू और आमदा ओपी प्रभारी रामरेखा पासवान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले की जानकारी दी.
पुलिस के अनुसार, बुधवार की रात करीब 1:20 बजे बड़ाबांबू चौक के पास दो लोगों द्वारा गोली चलाने और जोर-जोर से गाली-गलौज करने की सूचना मिली थी. सूचना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो युवकों को पकड़ लिया. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान खरसावां थाना क्षेत्र के पोटोबेड़ा निवासी निरंजन दास और खमारडीह निवासी सुनील साहू के रूप में की गई है.
कट्टा, मोबाइल और दो वाहन बरामद
पुलिस के मुताबिक तलाशी के दौरान एक देसी कट्टा बरामद किया गया, जिसमें एक गोली फंसी हुई थी. इसके अलावा दो मोबाइल फोन, एक एक्टिवा स्कूटी और एक एफजेड बाइक भी जब्त की गई है. पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी सुनील साहू का पूर्व से आपराधिक इतिहास रहा है. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फायरिंग किस वजह से की गई, बरामद हथियार कहां से आया और घटना से किसी अन्य व्यक्ति या आपराधिक कड़ी का संबंध तो नहीं है.
गिरफ्तारी तेज, मगर सवाल भी गंभीर
घटना के बाद पुलिस ने तेजी दिखाते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. बावजूद इसके सवाल यह है कि आधी रात बड़ाबांबू चौक जैसे सार्वजनिक स्थान के पास हथियार लेकर गोली चलाने की हिम्मत आखिर कैसे हुई ? यदि पुलिस के अनुसार आरोपी हथियार के साथ घूम रहे थे और फायरिंग की घटना हुई, तो यह क्षेत्र की रात्रि गश्ती और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत की ओर भी इशारा करता है.
सवाल केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है. यह भी महत्वपूर्ण है कि हथियार आरोपियों तक कैसे पहुंचा और फायरिंग के पीछे वास्तविक कारण क्या था. पुलिस की जांच में इन सवालों का जवाब सामने आना बाकी है.
आधी रात चौक पर गोली चलने की घटना के बाद अब आम लोगों की नजर पुलिस की आगे की जांच और कार्रवाई पर है. त्वरित गिरफ्तारी से कार्रवाई का संदेश जरूर गया है, लेकिन अपराधियों में कानून का खौफ कायम रखने के लिए ऐसी घटनाओं की जड़ तक पहुंचना भी उतना ही जरूरी है.
प्रमोद सिंह (संपादक)

