सरायकेला: कुचाई प्रखंड के कुंजाडीह गांव में पारंपरिक आस्था और श्रद्धा के साथ वार्षिक जंताल पूजा का आयोजन किया गया. इस अवसर पर गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा स्थलों पर पहुंचे. श्रद्धालुओं ने ग्राम देवी-देवताओं की आराधना कर परिवार और गांव की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की.


जंताल पूजा के अवसर पर मां पाउडी, अंधारी पाट और ग्राम देवता झुमकेशरी सहित विभिन्न पूजा स्थलों पर पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ पूजा-अर्चना की गई. परंपरा के अनुसार देउरी बोलो नायक ने सुबह से उपवास रखकर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया. देवी-देवताओं को नए फल, फूल और नए धान से तैयार चावल का भोग अर्पित किया गया.
अच्छी फसल और गांव की खुशहाली की कामना
पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने मां पाउडी और ग्राम देवता झुमकेशरी के दरबार में अपनी परंपरा और मान्यता के अनुसार भेड़, बकरा एवं मुर्गा की बलि भी चढ़ाई. ग्रामीणों की मान्यता है कि वार्षिक जंताल पूजा से गांव में सुख-समृद्धि बनी रहती है, अच्छी फसल होती है और प्राकृतिक आपदाओं एवं बीमारियों से रक्षा होती है.
देउरी ने देवी-देवताओं का आह्वान कर गांव और क्षेत्र की खुशहाली के लिए विशेष प्रार्थना की. श्रद्धालुओं ने पूजा स्थलों पर माथा टेककर परिवार के बेहतर स्वास्थ्य और कृषि कार्यों में उन्नति की कामना की. अनुष्ठान संपन्न होने के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया.
ग्रामीणों ने बताया कि जंताल पूजा उनकी धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह परंपरा ग्रामीणों को एक सूत्र में जोड़ने और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से परिचित कराने का माध्यम है. गांव के बुजुर्गों ने युवाओं को पूजा की परंपरा और उसके महत्व की जानकारी भी दी.
इस अवसर पर तरणी कुराल, देवेन नापित, कृपा सिंधु पात्र, गोपीनाथ नायक, मनोज कुराल, निरील कुराल, प्रकाश कुराल, अजय नापित, दीनबंधु सिंह पात्र, भवानी आदित्य, निलेश आदित्य, विनोद आदित्य, निरंजन लेंका और जगबंधु लेंका सहित अन्य ग्रामीण एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे.

