जामताड़ा: सदर अस्पताल जामताड़ा में चिकित्सकों की समयबद्ध उपस्थिति और अस्पताल प्रबंधन की मॉनिटरिंग व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं. बिंदापाथर थाना क्षेत्र के चिहुटिया गांव निवासी ज्योत्सना देवी गंभीर रूप से घायल अवस्था में इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचीं. परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात डॉ. आर. जेबा की ड्यूटी सुबह 9 बजे से थी, लेकिन करीब 11 बजे तक वह अस्पताल नहीं पहुंचीं. हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने इस दावे से इनकार करते हुए कहा है कि चिकित्सक केवल करीब 15 मिनट विलंब से पहुंची थीं और मरीज का इलाज अस्पताल में मौजूद चिकित्सक द्वारा किया गया.


परिजनों के मुताबिक मरीज की स्थिति गंभीर थी और उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर करने की आवश्यकता बताई जा रही थी. आरोप है कि संबंधित चिकित्सक के मौजूद नहीं रहने के कारण रेफर प्रक्रिया में भी इंतजार करना पड़ा. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि गंभीर मरीज की स्थिति में यदि निर्धारित चिकित्सक उपलब्ध नहीं हों तो तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था क्या है और उसकी जिम्मेदारी किसकी है.
अस्पताल प्रबंधक ने कहा- 15 मिनट देर से पहुंची थीं डॉक्टर
अस्पताल प्रबंधक विनित कुमार ने बताया कि डॉ. आर. जेबा अस्पताल में उपस्थित थीं, हालांकि वह करीब 15 मिनट विलंब से पहुंची थीं. उन्होंने कहा कि घायल मरीज को बिना इलाज के नहीं छोड़ा गया और अस्पताल में मौजूद दूसरे चिकित्सक द्वारा उसका उपचार किया गया.
इस तरह चिकित्सक के अस्पताल पहुंचने के समय को लेकर परिजनों और अस्पताल प्रबंधन के दावों में स्पष्ट अंतर सामने आया है. वास्तविक स्थिति अस्पताल की उपस्थिति पंजी, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड अथवा अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच से स्पष्ट हो सकती है.
मामले में डॉ. आर. जेबा का पक्ष जानने के लिए दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका.
सिविल सर्जन बोले- जांच के बाद दोषी मिलने पर कार्रवाई
सिविल सर्जन डॉ. एस.के. मिश्रा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि चिकित्सक अपने निर्धारित ड्यूटी आवर में उपस्थित थीं या नहीं, इसकी जानकारी ली जाएगी. मामले की जांच कराई जाएगी और यदि जांच में लापरवाही पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
अब निगाह स्वास्थ्य विभाग की जांच पर है. जांच से ही स्पष्ट होगा कि डॉक्टर कितने बजे अस्पताल पहुंचीं, गंभीर मरीज को किस समय चिकित्सा सुविधा मिली और रेफर प्रक्रिया में किसी स्तर पर अनावश्यक विलंब हुआ या नहीं.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

