रांची: झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार के साथ एक बेहद दुखद और असामान्य संयोग जुड़ गया है. वर्ष 2019 में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद पद पर रहते जिन मंत्रियों का निधन हुआ, उनमें तीन मंत्री सीधे तौर पर राज्य के शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. पहले जगरनाथ महतो, फिर रामदास सोरेन और अब उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का निधन हो गया. रविवार तड़के सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन ने इस दुखद संयोग को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है.


जगरनाथ महतो और रामदास सोरेन स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के मंत्री थे, जबकि सुदिव्य कुमार सोनू उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. इस तरह महज कुछ वर्षों के अंतराल में राज्य की शिक्षा व्यवस्था की कमान संभालने वाले तीन मंत्रियों का पद पर रहते निधन होना झारखंड की राजनीति के लिए एक अत्यंत दुखद संयोग बन गया है.
6 अप्रैल 2023: जगरनाथ महतो के निधन से लगा था पहला बड़ा झटका
हेमंत सरकार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री रहे जगरनाथ महतो का 6 अप्रैल 2023 को निधन हुआ था. कोरोना संक्रमण के बाद उनके फेफड़े गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे और लंबे समय से उनका इलाज चल रहा था. चेन्नई के अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली. जगरनाथ महतो झारखंड की राजनीति में जुझारू और जमीन से जुड़े नेता के रूप में पहचाने जाते थे. उनके निधन के बाद पत्नी बेबी देवी को मंत्री बनाया गया और झामुमो ने उन्हें डुमरी विधानसभा उपचुनाव में उतारा. बेबी देवी ने उपचुनाव में जीत हासिल की, हालांकि 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्हें जयराम महतो से हार का सामना करना पड़ा.
15 अगस्त 2025: रामदास सोरेन के निधन से फिर खाली हुआ शिक्षा मंत्री का पद
दूसरा बड़ा आघात 15 अगस्त 2025 को लगा. स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री रामदास सोरेन का दिल्ली में इलाज के दौरान निधन हो गया. किडनी प्रत्यारोपण करा चुके रामदास सोरेन 2 अगस्त को अपने घर के बाथरूम में गिर गए थे. गंभीर स्थिति में उन्हें दिल्ली ले जाया गया था, लेकिन चिकित्सकों के प्रयास के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका. उनके निधन के बाद घाटशिला विधानसभा सीट खाली हुई. झामुमो ने उनके पुत्र सोमेश सोरेन को उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया और वे जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचे.
6 सितंबर 2026: अब उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य सोनू का निधन
अब लगभग एक वर्ष के अंतराल पर शिक्षा क्षेत्र से जुड़े एक और मंत्री ने दुनिया को अलविदा कह दिया. गिरिडीह विधायक और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का रविवार, 6 सितंबर 2026 को आकस्मिक निधन हो गया. शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक शनिवार देर रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. उनके निधन की खबर रविवार सुबह सामने आते ही पूरे झारखंड के राजनीतिक गलियारे में शोक की लहर दौड़ गई.
तीन तारीखें, शिक्षा विभाग और तीन असमय विदाई
इस दुखद संयोग को तीन तारीखों में समझा जा सकता है.
जगरनाथ महतो- 6 अप्रैल 2023 (स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री)
रामदास सोरेन- 15 अगस्त 2025 (स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री)
सुदिव्य कुमार सोनू- 6 सितंबर 2026 (उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री)
इन तीनों नेताओं का निधन उस समय हुआ, जब वे सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. जगरनाथ महतो और रामदास सोरेन के पास स्कूली शिक्षा की जिम्मेदारी थी, जबकि सुदिव्य सोनू राज्य में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा की कमान संभाल रहे थे.
हाजी हुसैन को जोड़ें तो हेमंत सरकार ने पद पर रहते खोए चार मंत्री
शिक्षा विभाग से जुड़े इन तीन मंत्रियों के अलावा हेमंत सोरेन के 2019 में सत्ता संभालने के बाद मंत्री पद पर रहते हाजी हुसैन अंसारी का भी निधन हुआ था. इस तरह 2019 के बाद हेमंत सरकार में पद पर रहते निधन होने वाले मंत्रियों की संख्या चार हो गई है. हाजी हुसैन अंसारी के निधन के बाद उनके पुत्र हफीजुल हसन ने राजनीतिक विरासत संभाली. जगरनाथ महतो के निधन के बाद पत्नी बेबी देवी और रामदास सोरेन के निधन के बाद पुत्र सोमेश सोरेन चुनावी राजनीति में आगे आए. अब सुदिव्य सोनू के निधन से गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र और हेमंत मंत्रिमंडल दोनों में बड़ा राजनीतिक शून्य पैदा हो गया है.
सबसे चौंकाने वाला सुदिव्य सोनू का जाना
सुदिव्य कुमार सोनू का निधन इसलिए ज्यादा स्तब्ध करने वाला है क्योंकि वे शनिवार तक राजनीतिक और सार्वजनिक गतिविधियों में सक्रिय थे. वे 2019 और 2024 में गिरिडीह विधानसभा सीट से निर्वाचित हुए थे और मौजूदा सरकार के प्रमुख चेहरों में उनकी गिनती होती थी. उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में भी उनके आकस्मिक कार्डियक अरेस्ट से निधन की पुष्टि की गई है. सरकार में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के साथ नगर विकास जैसे महत्वपूर्ण विभाग उनके पास थे. छात्र आंदोलनों से लेकर विधानसभा में विपक्ष के हमलों का जवाब देने तक वे सरकार की ओर से आगे दिखाई देते थे. इसलिए उनका निधन केवल गिरिडीह की राजनीति या एक विधानसभा सीट तक सीमित नुकसान नहीं माना जा रहा, बल्कि हेमंत सरकार के लिए भी बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक झटका है.
विधानसभा नहीं लाया जाएगा पार्थिव शरीर, गिरिडीह में ही अंतिम विदाई
परिवार और पार्टी स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार सुदिव्य कुमार सोनू के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए झारखंड विधानसभा नहीं लाया जाएगा. उनका अंतिम संस्कार रविवार को ही उनके गृह क्षेत्र गिरिडीह में किए जाने की तैयारी है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भी दोपहर करीब 12 बजे तक गिरिडीह पहुंचने का कार्यक्रम बताया गया है. सुदिव्य सोनू के आकस्मिक निधन के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने प्रस्तावित कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया है. इन अंतिम संस्कार संबंधी ताजा कार्यक्रमों की विस्तृत आधिकारिक सूचना अभी उपलब्ध वेब स्रोतों में नहीं मिली है, इसलिए समय या कार्यक्रम में बदलाव संभव है.
शिक्षा विभाग के लिए भी बड़ा झटका
इस पूरे घटनाक्रम का एक प्रशासनिक पहलू भी है. कुछ ही वर्षों के भीतर स्कूली शिक्षा विभाग ने जगरनाथ महतो और रामदास सोरेन को खोया, जबकि अब उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के मंत्री सुदिव्य सोनू का निधन हुआ है. तीनों नेताओं की मृत्यु की परिस्थितियां अलग- अलग रहीं और इन्हें किसी तरह आपस में जोड़कर देखना उचित नहीं होगा. लेकिन राजनीतिक इतिहास के लिहाज से यह तथ्य जरूर उल्लेखनीय रहेगा कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार में पद पर रहते निधन हुए चार मंत्रियों में तीन उस समय शिक्षा के किसी न किसी महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. जगरनाथ महतो से रामदास सोरेन और अब सुदिव्य कुमार सोनू तक का यह सिलसिला झारखंड की राजनीति का एक बेहद पीड़ादायक अध्याय बन गया है.
संतोष कुमार

