सरायकेला: जमशेदपुर के युवा कारोबारी निखार सबलोक हत्याकांड में पुलिस द्वारा मुख्य साजिशकर्ता बताए गए अशोक कुमार सिंह उर्फ राघव की जेल जाने से बचने की तमाम अटकलों पर शुक्रवार को फिलहाल विराम लग गया. टाटा मुख्य अस्पताल (TMH) से डिस्चार्ज होने के बाद पुलिस उसे कड़ी सुरक्षा के बीच चांडिल अनुमंडल न्यायालय लेकर पहुंची. पेशी और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत ने राघव को न्यायिक हिरासत में भेज दिया. इसके बाद पुलिस सुरक्षा में उसे सरायकेला मंडल कारा भेज दिया गया. राघव के कोर्ट पहुंचने से लेकर मंडल कारा रवाना होने तक पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे. निखार सबलोक हत्याकांड में उसकी कथित भूमिका और आपराधिक पृष्ठभूमि को देखते हुए पूरे घटनाक्रम पर पुलिस की विशेष नजर रही.


जेल जाने से पहले पत्नी से मुलाकात, बोला- ‘चिंता मत करना’
चांडिल अनुमंडल न्यायालय के समीप राघव की पत्नी भी उससे मिलने पहुंची. जेल रवाना होने से पहले दोनों की संक्षिप्त मुलाकात हुई. इस दौरान राघव ने पत्नी से “चिंता मत करना” कहा. इसके बाद पुलिस उसे वाहन में बैठाकर कड़ी सुरक्षा के बीच सरायकेला मंडल कारा ले गई. राघव के इस बयान को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं. हालांकि यह सामान्य पारिवारिक ढांढस था या इसके पीछे कोई और आत्मविश्वास, इसे लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा.
TMH से सीधे कोर्ट, नहीं मिला अस्पताल में बने रहने का मौका
राघव को निखार सबलोक हत्याकांड की जांच के दौरान पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था. इसी दौरान उसकी तबीयत बिगड़ने की शिकायत के बाद पहले उसे MGM और बाद में TMH में भर्ती कराया गया था. अस्पताल में रहते हुए ही पुलिस जांच में उसकी भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने का दावा किया गया. इसके बाद पुलिस ने TMH में ही उसे अपनी निगरानी में रखा. शुक्रवार को अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही पुलिस ने उसे सीधे चांडिल अनुमंडल न्यायालय में पेश किया. अदालत द्वारा न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद उसे मंडल कारा भेज दिया गया.
अब जेल से अस्पताल पहुंचने की कोशिश की आशंका
राघव के सरायकेला मंडल कारा भेजे जाने के बावजूद इस मामले में चर्चाएं थमी नहीं हैं. सूत्रों के बीच आशंका जताई जा रही है कि अब स्वास्थ्य संबंधी शिकायत के आधार पर जेल प्रशासन के माध्यम से उसे पहले सरायकेला सदर अस्पताल भेजने की कोशिश हो सकती है. वहां से चिकित्सकीय आधार पर MGM मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जमशेदपुर और उसके बाद उच्च चिकित्सा संस्थान के रूप में रांची स्थित RIMS रेफर कराने का प्रयास किए जाने की चर्चा है. इस संभावित घटनाक्रम के पीछे राघव की कथित पहुंच और रसूख का हवाला दिया जा रहा है. हालांकि अभी यह केवल सूत्रों के स्तर पर जताई जा रही आशंका है. जेल प्रशासन अथवा किसी सरकारी चिकित्सक ने राघव को अनफिट घोषित नहीं किया है और न ही सदर अस्पताल, MGM अथवा RIMS रेफर करने का कोई आधिकारिक आदेश सामने आया है. ऐसे में आगे की स्थिति पूरी तरह मेडिकल परीक्षण और सक्षम प्राधिकार के निर्णय पर निर्भर करेगी.
TMH में भर्ती रहने के दौरान इंटरव्यू से खड़ा हुआ था विवाद
राघव के TMH में भर्ती रहने के दौरान पूरा मामला उस समय और चर्चा में आया जब अस्पताल से उसका एक कथित इंटरव्यू प्रकाशित हुआ. इसमें उसने निखार सबलोक हत्याकांड को लेकर दुमका जेल में बंद गैंगस्टर अखिलेश सिंह की ओर इशारा किया था. इसके बाद सवाल उठने लगे थे कि हत्या जैसे गंभीर मामले की जांच के बीच पुलिस निगरानी में मौजूद व्यक्ति तक मीडिया की पहुंच कैसे हुई. सूत्रों के अनुसार इसके बाद पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए TMH प्रबंधन से राघव की मेडिकल स्थिति और इलाज से संबंधित रिपोर्ट मांगी थी. शुक्रवार को उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया.
पुलिस जांच में राघव को बताया गया मुख्य साजिशकर्ता
निखार सबलोक की 24 अगस्त को चांडिल थाना क्षेत्र के आसनबनी स्थित टेंथ माइल रिसोर्ट के समीप गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हत्याकांड के बाद गठित SIT ने जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां में कई लोगों से पूछताछ की. पुलिस के खुलासे में हत्याकांड के पीछे जमीन विवाद, गैंगवार और आपराधिक वर्चस्व की लड़ाई का एंगल सामने आया. पुलिस ने राघव को साजिश के प्रमुख किरदार के रूप में पेश किया. जांच में 15 लाख रुपये की सुपारी और उत्तर प्रदेश से शूटर बुलाए जाने की बात भी सामने आई थी. पुलिस ने हथियार, कारतूस, मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल वाहन बरामद करने का दावा किया था.
अखिलेश सिंह का नाम सामने आने के बाद अपराध जगत में हलचल
मामले का एक संवेदनशील पहलू गैंगस्टर अखिलेश सिंह से जुड़ा है. अशोक सिंह राघव का नाम पूर्व में अखिलेश सिंह के नेटवर्क से जुड़ता रहा है. TMH से सामने आए कथित इंटरव्यू में अखिलेश सिंह का नाम आने के बाद अपराध जगत में भी कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं. सूत्रों के बीच यह चर्चा है कि निखार हत्याकांड के बाद दोनों के बीच समीकरण बदल सकते हैं. राघव द्वारा अखिलेश का नाम सामने लाने के पीछे क्या रणनीति थी, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है. इसी पृष्ठभूमि में राघव की जेल में सुरक्षा को लेकर भी चर्चाएं हैं. मगर किसी संभावित हमले या खतरे को तथ्य के रूप में नहीं कहा जा सकता, जब तक पुलिस या जेल प्रशासन इसकी पुष्टि नहीं करता.
जेल पहुंचा राघव, लेकिन कहानी अभी बाकी
फिलहाल शुक्रवार का सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम यही रहा कि TMH से डिस्चार्ज होने के बाद अशोक सिंह राघव को अदालत से कोई ऐसी राहत नहीं मिली जिससे वह न्यायिक हिरासत से बच सके. चांडिल अनुमंडल न्यायालय ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया और कड़ी सुरक्षा के बीच वह सरायकेला मंडल कारा पहुंच गया. अब निगाह सरायकेला मंडल कारा में होने वाली उसकी चिकित्सकीय जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर रहेगी. यदि स्वास्थ्य संबंधी कोई गंभीर समस्या सामने आती है तो उसे कहां इलाज के लिए भेजा जाता है, यह चिकित्सकीय रिपोर्ट और नियमानुसार सक्षम प्राधिकार तय करेगा.
दूसरी ओर सूत्रों में चल रही चर्चा यह है कि क्या राघव जेल में ही रहेगा या स्वास्थ्य संबंधी आधार पर सदर अस्पताल से MGM और अंततः RIMS तक पहुंचने की कोई प्रक्रिया शुरू होती है. फिलहाल इस संभावना को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है. निखार सबलोक हत्याकांड की जांच के लिहाज से राघव का जेल जाना एक महत्वपूर्ण पड़ाव जरूर है, लेकिन पूरे मामले की कहानी अभी समाप्त नहीं हुई है. फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, हत्या की साजिश की शेष कड़ियां और गैंगवार से जुड़े संभावित नेटवर्क पर पुलिस की आगे की कार्रवाई से इस बहुचर्चित हत्याकांड की कुछ और परतें खुल सकती हैं.

