सरायकेला: राजकीय छऊ कला केंद्र के समग्र विकास, संरक्षण और संवर्धन की दिशा में शनिवार को महत्वपूर्ण पहल हुई. उपायुक्त नीतिश कुमार सिंह की अध्यक्षता और खरसावां विधायक दशरथ गागराई की उपस्थिति में आयोजित बैठक में केंद्र की आधारभूत संरचना से लेकर मानव संसाधन, नियुक्ति और प्रशिक्षण व्यवस्था तक के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक में तय किया गया कि सभी आवश्यकताओं को समाहित करते हुए सर्वसम्मति से समग्र प्रस्ताव तैयार कर संस्कृति, कला एवं खेल विभाग, झारखंड सरकार को भेजा जाएगा.


बैठक में विभाग से प्राप्त प्रस्ताव के आलोक में छऊ कला केंद्र के इंफ्रास्ट्रक्चर गैप, आवश्यक मानव संसाधन, संविदा आधारित एवं स्थायी नियुक्ति, प्रशिक्षण व्यवस्था और केंद्र के प्रभावी संचालन पर मंथन किया गया. कोर कमेटी एवं स्टीयरिंग कमेटी की संख्या और संरचना को लेकर भी सदस्यों से सुझाव लिए गए.
पहले अनुमंडल स्तर पर होगा बिंदुवार मंथन
उपायुक्त ने निर्देश दिया कि अनुमंडल स्तर पर बैठक आयोजित कर केंद्र की वास्तविक जरूरतों का बिंदुवार आकलन किया जाए. इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर गैप, संविदा आधारित नियुक्ति, प्रशिक्षण व्यवस्था और अन्य आवश्यक प्रस्तावों पर चर्चा कर सर्वसम्मति बनाई जाएगी.
इसके बाद अनुमंडल स्तर से तैयार प्रस्ताव पर जिला स्तर की बैठक में विचार किया जाएगा. यहां आवश्यक निर्णय और अनुमोदन के बाद समेकित प्रस्ताव राज्य सरकार के संबंधित विभाग को भेजा जाएगा. यानी छऊ कला केंद्र के भविष्य की कार्ययोजना को चरणबद्ध तरीके से अंतिम स्वरूप देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.
केवल भवन नहीं, मानव संसाधन और प्रशिक्षण पर भी फोकस
बैठक की अहम बात यह रही कि चर्चा केवल आधारभूत संरचना तक सीमित नहीं रही. प्रशिक्षकों एवं अन्य आवश्यक मानव संसाधन, संविदा और स्थायी नियुक्ति तथा प्रशिक्षण व्यवस्था जैसे उन मुद्दों को भी शामिल किया गया, जिन्हें कलाकार लंबे समय से कला केंद्र को मजबूत करने के लिए जरूरी बताते रहे हैं.
उपायुक्त नीतिश कुमार सिंह ने कहा कि सरायकेला छऊ, खरसावां छऊ और मानभूम छऊ की समृद्ध कला परंपरा एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए सभी संबंधित पक्षों को एकजुट होकर काम करना होगा. उन्होंने नई पीढ़ी को छऊ से जोड़ने, प्रशिक्षण के अवसर बढ़ाने और स्थानीय कलाकारों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए योजनाबद्ध एवं परिणामोन्मुखी प्रयास पर जोर दिया.
छऊ केंद्र सिर्फ प्रशिक्षण केंद्र नहीं, विरासत का केंद्र बने: दशरथ गागराई
खरसावां विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि सरायकेला-खरसावां की धरती छऊ कला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए विशिष्ट पहचान रखती है. सरायकेला, खरसावां और मानभूम छऊ की विशिष्टता को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए कलाकारों, कला-संस्कृति से जुड़े लोगों, समितियों, प्रशासन और सरकार को मिलकर काम करना होगा.
उन्होंने आधारभूत संरचना, बेहतर प्रशिक्षण, कलाकारों के प्रोत्साहन और छऊ के व्यापक प्रचार-प्रसार को शामिल करते हुए एक सुव्यवस्थित प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि छऊ कला केंद्र को केवल प्रशिक्षण देने वाली संस्था के रूप में नहीं, बल्कि छऊ की परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए.
अब प्रस्ताव से परिणाम तक की परीक्षा
लंबे समय से प्रशिक्षकों, आवश्यक कर्मचारियों और संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने की मांग के बीच हुई यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है. अब अगला अहम पड़ाव अनुमंडल स्तर पर प्रस्तावों को ठोस स्वरूप देना और उसके बाद जिला स्तर से उन्हें अनुमोदित कर सरकार तक पहुंचाना होगा.
बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी अभिनव प्रकाश, जिला खेल पदाधिकारी अमित कुमार, कोर कमेटी एवं स्टीयरिंग कमेटी के सदस्यों सहित अन्य संबंधित लोग उपस्थित थे.
अब कलाकारों की निगाह इस बात पर रहेगी कि वर्षों से उठ रही मांगें प्रस्ताव का हिस्सा बनने के बाद कितनी तेजी से धरातल पर उतरती हैं. क्योंकि विश्व पटल पर पहचान बना चुकी छऊ कला के लिए मजबूत भवन के साथ मजबूत संस्थागत व्यवस्था, प्रशिक्षक और नई पीढ़ी के लिए अवसर भी उतने ही जरूरी हैं.

