सरायकेला: चांडिल थाना क्षेत्र के एनएच-32 स्थित टेंथ माइल स्टोन होटल के समीप पिछले सोमवार को जमशेदपुर के युवा कारोबारी निखार सबलोक की हत्या के छह दिन बीत चुके हैं, लेकिन मामले में अब तक किसी मुख्य आरोपी अथवा शूटर की गिरफ्तारी की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. हालांकि पुलिस का दावा है कि हिरासत में लिए गए संदिग्धों से पूछताछ में कई अहम सुराग मिले हैं और जांच तेजी से आगे बढ़ी है. शूटरों की पहचान कर लिए जाने की बात भी सामने आई है. उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें अलग-अलग राज्यों में दबिश दे रही हैं.


इन सबके बीच जांच को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल उन संदिग्धों को लेकर है, जिनसे कथित तौर पर पिछले कई दिनों से पूछताछ की जा रही है. यदि उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं तो अब तक आगे की कानूनी कार्रवाई क्या हुई और यदि पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं तो उनसे इतने लंबे समय तक पूछताछ किस प्रक्रिया के तहत की जा रही है ? हालांकि पुलिस सबूत नहीं मिलने पर कई लोगों को पूछताछ के बाद छोड़ भी चुकी है.
*कई अधिकारी जांच में जुटे, डीआईजी कर रहे मॉनिटरिंग*
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कोल्हान डीआईजी स्वयं जांच की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. जमशेदपुर और सरायकेला- खरसावां पुलिस के कई अधिकारी हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में जुटे हैं. पुलिस का दावा है कि अपराध से जुड़ी कई कड़ियां सामने आ चुकी हैं और उन्हें साक्ष्यों के साथ जोड़ने का काम चल रहा है.
इसके बावजूद छह दिन बाद भी हत्याकांड का आधिकारिक खुलासा नहीं होने से सवाल लगातार बढ़ रहे हैं. यदि शूटर चिह्नित हो चुके हैं तो वे कौन हैं ? हत्या के पीछे वास्तविक मकसद क्या था ? वारदात की साजिश किसने रची ? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल, क्या जांच की आंच केवल वारदात को अंजाम देने वालों तक सीमित रहेगी या इसके पीछे मौजूद वास्तविक साजिशकर्ता तक भी पहुंचेगी ?
*क्या सामने आएगा हत्या का असल मकसद ?*
निखार सबलोक हत्याकांड में सबसे ज्यादा निगाहें हत्या के वास्तविक कारण और उसके पीछे मौजूद लोगों पर टिकी हैं. जमशेदपुर में पहले भी कई चर्चित आपराधिक मामलों में घटना के पीछे की पूरी कहानी को लेकर लंबे समय तक सवाल उठते रहे हैं. कैरव गांधी अपहरण कांड, करणी सेना के नेता विनय सिंह हत्याकांड और कुख्यात कनौजिया एनकाउंटर का उदाहरण भी अक्सर ऐसे मामलों की चर्चा के दौरान सामने आता रहा है. ऐसे में निखार सबलोक हत्याकांड में पुलिस के सामने चुनौती केवल शूटरों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है. चुनौती यह भी है कि हत्या की साजिश, उसका मकसद और उसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका साक्ष्यों के साथ सार्वजनिक की जाए.
*पैरवी और प्रभाव की चर्चा, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं*
मामले को लेकर अंदरखाने कई तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं. प्रभावशाली लोगों की पैरवी और जांच को प्रभावित करने के प्रयासों की बातें सामने आ रही हैं. हालांकि इन चर्चाओं की स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. इसलिए सबसे महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस अपने खुलासे में साक्ष्यों के आधार पर इन तमाम आशंकाओं और सवालों का जवाब दे.
जैसे- जैसे हत्याकांड के बाद दिन बीत रहे हैं, पुलिस की ओर से सीमित जानकारी सामने आने के कारण अटकलों का बाजार भी गर्म हो रहा है. अब सबकी निगाहें पुलिस के आधिकारिक खुलासे पर टिकी हैं. यह खुलासा ही तय करेगा कि जांच केवल वारदात को अंजाम देने वाले चेहरों तक पहुंची है या हत्या की पूरी साजिश और उसके पीछे मौजूद असल किरदारों को भी बेनकाब करेगी.

