कांड्रा: अमलगम स्टील एंड पावर लिमिटेड की ओर से सामाजिक दायित्व के तहत कांड्रा पंचायत में ‘प्रोजेक्ट आरोग्यम’ के अंतर्गत निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया. शिविर में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई और जरूरतमंदों के बीच दवाइयों का वितरण किया गया. चिकित्सकों ने ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी दिया.


कंपनी की इस पहल के बीच औद्योगिक गतिविधियों से होने वाले कथित वायु प्रदूषण को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी की चिमनी से निकलने वाले धुएं और आसपास उड़ने वाली धूल के कारण क्षेत्र के वातावरण पर असर पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार इलाके में धूल-धुआं और प्रदूषण की स्थिति देखने को मिलती है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी रहती है.
स्वास्थ्य शिविर के साथ प्रदूषण पर भी सवाल.
ग्रामीणों के बीच सवाल उठ रहा है कि एक ओर कंपनी स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध करा रही है, वहीं दूसरी ओर यदि औद्योगिक गतिविधियों के कारण प्रदूषण की समस्या सामने आ रही है तो उसे नियंत्रित करने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं.
लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य शिविर जरूरतमंदों के लिए निश्चित रूप से उपयोगी है, लेकिन यदि क्षेत्र में प्रदूषण की समस्या बनी हुई है तो केवल स्वास्थ्य जांच और दवा वितरण से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा. प्रदूषण के स्रोत की जांच और उस पर नियंत्रण भी जरूरी है.
प्रदूषण नियंत्रण की निष्पक्ष जांच की मांग.
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से कंपनी की चिमनियों से निकलने वाले धुएं, उत्सर्जन स्तर और आसपास की वायु गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है. लोगों का कहना है कि यदि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए.
इलाज से ज्यादा जरूरी बीमारी से बचाव.
स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीणों को बीमार होने के बाद इलाज उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें बीमार होने से बचाने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए. स्वास्थ्य सुविधा और पर्यावरण संरक्षण दोनों को साथ लेकर चलना ही क्षेत्र के लोगों के हित में होगा.
फिलहाल स्वास्थ्य शिविर को लेकर ग्रामीणों में सकारात्मक प्रतिक्रिया है, लेकिन इसके साथ उठे प्रदूषण संबंधी सवालों का जवाब संबंधित कंपनी और विभाग की ओर से सामने आना बाकी है. प्रदूषण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए वैज्ञानिक और निष्पक्ष जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
रिपोर्ट: विपिन वार्ष्णेय

