Editorial 15 अगस्त 2026 को भारत अपना 80वां स्वाधीनता दिवस मना रहा है. यह केवल तिरंगा फहराने, राष्ट्रगान गाने और आजादी के संघर्ष को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन का भी दिन है कि स्वतंत्रता के 79 वर्षों में हमने देश को कहां पहुंचाया और आने वाली पीढ़ी को कैसा भारत सौंपने जा रहे हैं.




आज भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है नई पीढ़ी को राष्ट्र की विकास यात्रा से जोड़ना. “जेन जी” और “जेन अल्फा” उस दौर की पीढ़ियां हैं, जिनका बचपन इंटरनेट, मोबाइल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सामाजिक माध्यमों के बीच बीता है. उनके सामने सूचनाओं की कमी नहीं है, लेकिन सही सूचना और गलत सूचना के बीच फर्क करना बड़ी चुनौती बन चुका है. उनके पास अवसर पहले से अधिक हैं, लेकिन मानसिक दबाव, रोजगार की अनिश्चितता, प्रतिस्पर्धा, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और आभासी दुनिया में बढ़ती निर्भरता भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है.

भारत की आजादी का अर्थ केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं था. उसका उद्देश्य ऐसा समाज बनाना भी था, जहां प्रत्येक नागरिक को सम्मान, शिक्षा, रोजगार और अवसर मिल सके. इसलिए आज की पीढ़ी से यह पूछना जरूरी है कि क्या वह केवल उपभोक्ता बनना चाहती है या देश के निर्माण में भागीदार भी बनेगी.

बिहार और झारखंड के सामने यह चुनौती और गहरी है. दोनों राज्यों के पास युवा आबादी, प्राकृतिक संसाधन और अपार संभावनाएं हैं, लेकिन रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, पलायन और नशे जैसी समस्याएं विकास की राह में बड़ी बाधा हैं. बिहार का बड़ा युवा वर्ग रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर जाता है, जबकि झारखंड जैसे खनिज संपदा से समृद्ध राज्य में भी स्थानीय युवाओं के लिए पर्याप्त गुणवत्तापूर्ण रोजगार पैदा नहीं हो सका है.

बिहार-झारखंड की अगली पीढ़ी को केवल सरकारी नौकरी की प्रतीक्षा करने वाली पीढ़ी बनाने के बजाय उद्यम, तकनीक, कृषि, उद्योग, खेल और नए व्यवसायों से जोड़ना होगा. विद्यालय और विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने के केंद्र नहीं, बल्कि भविष्य निर्माण की प्रयोगशाला बनने चाहिए.




80वां स्वाधीनता दिवस हमें यही संदेश देता है कि आजादी की रक्षा सीमा पर खड़ा सैनिक ही नहीं करता. एक ईमानदार शिक्षक, जिम्मेदार पत्रकार, मेहनती किसान, वैज्ञानिक, उद्यमी, मजदूर और जागरूक युवा भी राष्ट्र की स्वतंत्रता को मजबूत करता है.

आजादी की पहली पीढ़ी ने देश को स्वतंत्र कराया था. अब जेन जी और जेन अल्फा की जिम्मेदारी है कि वे भारत को सक्षम, शिक्षित, रोजगारयुक्त, वैज्ञानिक और संवेदनशील राष्ट्र बनाएं. आने वाले भारत की असली तस्वीर संसद से ज्यादा इन युवाओं की सोच और उनके कर्म से तय होगी.





























इसलिए 15 अगस्त केवल उत्सव नहीं, एक सवाल भी है- हम आजादी के 100वें वर्ष में कैसा भारत देखना चाहते हैं और उसे बनाने के लिए आज क्या कर रहे हैं ?
संतोष कुमार
प्रधान संपादक





