रांची: जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर राजधानी रांची में चल रहा छात्र आंदोलन सोमवार को उस समय उग्र हो गया, जब हजारों की संख्या में छात्र विधानसभा घेराव के लिए सड़क पर उतर आए. छात्रों ने पुलिस की ओर से लगाए गए बैरिकेडिंग को कई स्थानों पर तोड़ते हुए आगे बढ़ने का प्रयास किया. इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई जगहों पर टकराव की स्थिति बनी. पुलिस की ओर से आंसू गैस के गोले दागे गए और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया, जबकि प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर पानी की बोतलें और पत्थर फेंके जाने की बात सामने आई है.


सोमवार के घटनाक्रम के बाद अब यह आंदोलन केवल छात्रों और सरकार के बीच का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसने प्रदेश की राजनीति को भी गरमा दिया है. मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को संपूर्ण झारखंड बंद का आह्वान किया है. वहीं सरकार की ओर से छात्रों को भरोसा दिलाया गया है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और परीक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाएंगे.

विधानसभा घेराव के दौरान बढ़ा तनाव
छात्रों ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से विधानसभा घेराव के लिए मार्च शुरू किया. पुलिस ने छात्रों को विधानसभा की ओर बढ़ने से रोकने के लिए जगह-जगह बैरिकेडिंग की थी. लेकिन प्रदर्शनकारी छात्र लगातार आगे बढ़ते रहे. कई स्थानों पर छात्रों ने बैरिकेडिंग को पार कर दिया.
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया. इसके बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए. इसी दौरान कुछ छात्रों के विधानसभा परिसर की ओर पहुंचने की भी जानकारी सामने आई. पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच काफी देर तक गतिरोध बना रहा. देर रात पुलिस ने बलपूर्वक छात्रों को विधानसा से बाहर निकाला. प्रदर्शन के दौरान छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है. उन्हें उपचार के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें आईसीयू में भर्ती किए जाने की बात कही गई है.
लाठीचार्ज को लेकर आमने- सामने सरकार और विपक्ष
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर भाजपा ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों पर पुलिस लाठीचार्ज का विरोध करते हुए मंगलवार को सुबह 8 बजे से रात 11 बजे तक संपूर्ण झारखंड बंद का आह्वान किया है. बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों की आवाज को पुलिस बल के जरिए दबाने की कोशिश की गई. उन्होंने कहा कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच होनी चाहिए तथा पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए.

वहीं पुलिस और सरकार की ओर से लाठीचार्ज को लेकर अलग पक्ष सामने आया है. पुलिस का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सांकेतिक रूप से बल प्रयोग किया गया और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई.
मुख्यमंत्री ने छात्रों से की संवाद की अपील
पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों के नाम संदेश जारी कर उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से सुन रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को अपनी बात रखने का अधिकार है और सरकार की जिम्मेदारी है कि उनकी आवाज सुनी जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के वरिष्ठ मंत्री लगातार छात्रों से बातचीत कर रहे हैं और उनकी मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि दोषी चाहे कोई भी हो, सरकार ने कार्रवाई की है और परीक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है.
मुख्यमंत्री ने परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की बात कही. साथ ही छात्रों से अपील की कि वे राजनीतिक बहकावे में आने के बजाय संवाद और विश्वास के माध्यम से समस्या का समाधान निकालने में सहयोग करें.
स्वास्थ्य मंत्री ने भाजपा पर साधा निशाना
इधर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने मुख्यमंत्री आवास के घेराव को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन की आड़ में भाजपा नेताओं द्वारा राजनीतिक उपद्रव की कोशिश की गई. स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के आवास की सुरक्षा को चुनौती देना स्वीकार्य नहीं हो सकता. उन्होंने मुख्यमंत्री आवास के घेराव में शामिल भाजपा विधायकों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं का समाधान बातचीत और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होना चाहिए, न कि टकराव के रास्ते से.
छात्रों की मांगों पर अब भी गतिरोध
जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं. छात्रों की प्रमुख मांगों में पूरे मामले की सीबीआई जांच और सीजीएल परीक्षा को रद्द करना शामिल है. सरकार की ओर से पहले ही सीआईडी जांच शुरू किए जाने तथा परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कई कदम उठाए जाने का दावा किया गया है. लेकिन छात्र सरकार के इन कदमों से संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि जब तक पूरे मामले की स्वतंत्र जांच नहीं होती और उनकी प्रमुख मांगों पर निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
इसी बीच जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष की सीआईडी द्वारा गिरफ्तारी और मामले में अब तक कई लोगों की गिरफ्तारी ने भी इस विवाद को और गंभीर बना दिया है. जेपीएससी के तीन सदस्यों के इस्तीफे के बाद परीक्षा आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं.

एबीवीपी ने भी आंदोलन तेज करने का किया ऐलान
छात्र आंदोलन के बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भी आंदोलन को और व्यापक बनाने का ऐलान किया है. एबीवीपी की ओर से 11 अगस्त को छात्र मार्च निकाला जाएगा. यह मार्च सुबह 11:30 बजे तिनकोनिया स्थित पुराने विधानसभा मैदान से शुरू होकर नए विधानसभा भवन तक जाएगा. एबीवीपी का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं से छात्रों के भविष्य पर सीधा असर पड़ रहा है और सरकार को छात्रों की मांगों पर ठोस निर्णय लेना चाहिए.
अब बंद और छात्र मार्च पर टिकी नजर
सोमवार की झड़प के बाद मंगलवार को भाजपा के झारखंड बंद और इसके बाद 11 अगस्त को प्रस्तावित छात्र मार्च को लेकर प्रशासन के सामने भी बड़ी चुनौती है. एक ओर सरकार आंदोलन को बातचीत के जरिए समाप्त करने का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष इसे छात्रों के मुद्दे पर सरकार की विफलता बता रहा है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार और छात्रों के बीच बातचीत से कोई रास्ता निकल पाएगा या आंदोलन और व्यापक होगा. फिलहाल जेपीएससी- जेएसएससी विवाद ने झारखंड में छात्र राजनीति के साथ-साथ सियासी माहौल को भी पूरी तरह गरमा दिया है. आने वाले दिनों में सरकार, विपक्ष और छात्र संगठनों के अगले कदम पर पूरे राज्य की नजर रहेगी.

