जामताड़ा: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को जामताड़ा के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का भव्य नजारा देखने को मिला. मांझी परगना सरदार महासभा एवं सिद्ध-कानू मुर्मू सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों के साथ-साथ दूर-दराज से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए.



पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे महिला-पुरुषों और कलाकारों ने गीत-नृत्य की प्रस्तुतियों से गांधी मैदान को उत्सव के रंग में रंग दिया. कार्यक्रम का शुभारंभ मांझी परगना सरदार महासभा के जिला अध्यक्ष सुनील हांसदा के नेतृत्व में वीर सिद्ध-कानू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया. इसके बाद दिशोम गुरु शिबू सोरेन सहित समाज के अन्य महानायकों के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गयी.
मौके पर सुनील हांसदा ने विश्व आदिवासी दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि आदिवासियों के अधिकारों और हितों को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ में 9 अगस्त 1982 को पहली बैठक हुई थी. इसके बाद 9 अगस्त 1994 को विश्व आदिवासी दिवस को मान्यता दी गयी.
उन्होंने बताया कि जामताड़ा के गांधी मैदान में वर्ष 2008 से लगातार विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. इस वर्ष आयोजन का 19वां संस्करण है. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करना, नई पीढ़ी को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर शिक्षा को बढ़ावा देना है.
कार्यक्रम में महिला और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए. विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे कलाकारों ने आदिवासी गीतों की धुन पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया. मांदर की थाप और पारंपरिक गीतों से पूरा गांधी मैदान गूंज उठा. सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आदिवासी विरासत, परंपरा और सामाजिक एकता की जीवंत तस्वीर पेश की.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल





