सरायकेला: आस्था, श्रद्धा और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम शुक्रवार को सरायकेला की ऐतिहासिक बाहुड़ा रथ यात्रा में देखने को मिला. मौसीबाड़ी गुंडिचा मंदिर में नौ दिनों तक विराजमान रहने के बाद भगवान श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा दो दिवसीय वापसी यात्रा पर श्रीमंदिर के लिए रवाना हुए. रथ के आगे बढ़ते ही पूरा शहर “जय जगन्नाथ” के जयघोष से गूंज उठा और हजारों श्रद्धालु रथ की रस्सी खींचने उमड़ पड़े.



सरायकेला की बाहुड़ा रथ यात्रा की विशेष परंपरा के अनुसार महाप्रभु एक ही दिन में श्रीमंदिर नहीं पहुंचते. पहले दिन रथ कालूराम चौक तक पहुंचता है, जहां भगवान रात्रि विश्राम करते हैं. शनिवार को वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ महाप्रभु श्रीमंदिर में प्रवेश करेंगे.
कालूराम चौक पर रात्रि विश्राम के दौरान कालूराम सेवा ट्रस्ट की ओर से भव्य भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा. देर रात तक भजन-कीर्तन और आरती के बीच श्रद्धालु महाप्रभु के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे.
बाहुड़ा रथ यात्रा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए सरायकेला थाना प्रभारी विनय कुमार स्वयं पुलिस बल के साथ पूरे मार्ग में तैनात रहे. संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी. भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रही.
शनिवार को महाप्रभु के श्रीमंदिर पहुंचने के साथ नौ दिवसीय रथ यात्रा महोत्सव का विधिवत समापन होगा. सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी सरायकेला की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता का प्रतीक बनी हुई है.
प्रमोद सिंह (संपादक)





