
सरायकेला: कला नगरी में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा श्रद्धा, आस्था और भक्ति के माहौल में प्रारंभ हुई. महाप्रभु जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथ पर विराजमान होकर हजारों श्रद्धालुओं के बीच से मौसी बाड़ी की ओर प्रस्थान कर गए. पूरे शहर में “जय जगन्नाथ” के गगनभेदी जयघोष, ढोल- नगाड़ों और वैदिक मंत्रोच्चार से भक्तिमय वातावरण बन गया.


रथयात्रा शुरू होने से पहले श्रीमंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा- अर्चना की गई. इसके बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के विग्रहों को विधि- विधान के साथ रथ तक लाया गया. यहां सरायकेला राजपरिवार के राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव ने परंपरागत छेरा- पोहरा की रस्म निभाते हुए रथ की पूजा- अर्चना की.
परंपरा के अनुसार सबसे पहले भगवान बलभद्र, फिर भगवान जगन्नाथ और अंत में देवी सुभद्रा को रथ पर विराजमान कराया गया. जैसे ही मंदिर के पुजारियों ने रथ आगे बढ़ाने का संकेत दिया, हजारों श्रद्धालुओं ने रथ की रस्सी थामकर महाप्रभु का रथ खींचा. श्रद्धा और भक्ति से सराबोर इस दृश्य ने सभी श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया.

परंपरा के अनुसार गुरुवार रात महाप्रभु का रथ गोपबंधु चौक पर विश्राम करेगा. शुक्रवार को पुनः यात्रा प्रारंभ होगी और रथ गुंडिचा मंदिर (मौसी बाड़ी) पहुंचेगा, जहां भगवान जगन्नाथ नौ दिनों तक भक्तों को दर्शन देंगे.
रथयात्रा के दौरान सुरक्षा एवं विधि- व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे. श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच पूरी कला नगरी भक्ति और उत्साह के रंग में रंगी नजर आई.
प्रमोद सिंह (संपादक)





