
सरायकेला: जिला शिक्षा विभाग में सांत्वना जेना की नियुक्ति, सेवा विस्तार, वेतन वृद्धि और अब बीपीओ (ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर) प्रभारी बनाए जाने को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं. विभागीय हलकों और स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि जब सरकार ने पहले उन्हें बीपीओ बनाए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दी थी, तो आखिर किस नियम और अधिकार के तहत उन्हें बीपीओ प्रभारी की जिम्मेदारी सौंप दी गई. पूरे मामले को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कैलाश मिश्रा से जवाब मांगा जा रहा है.


चर्चा का केंद्र यह है कि सांत्वना जेना को आखिर किस प्रशासनिक आदेश और वैधानिक प्रावधान के तहत बीपीओ प्रभारी बनाया गया. सवाल उठ रहे हैं कि प्रभारी बनाए जाने से पहले वह किस पद पर कार्यरत थीं और उनकी सेवा की वैधानिक स्थिति क्या थी.
लोग यह भी पूछ रहे हैं कि यदि प्रारंभिक नियुक्ति केवल एक वर्ष के लिए दैनिक मानदेय (डेली बेसिस) पर की गई थी, तो उसके बाद उनका सेवा विस्तार किस आदेश के तहत किया गया. साथ ही इतने वर्षों तक नियमित रूप से वेतन भुगतान किस सरकारी स्वीकृति और नियम के आधार पर होता रहा.
मामले में वर्ष 2021 का वह प्रस्ताव भी चर्चा में है, जिसमें सांत्वना जेना को बीपीओ बनाए जाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था. आरोप है कि सरकार ने उस प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दी थी. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि प्रस्ताव निरस्त होने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी ने किस अधिकार के तहत उन्हें बीपीओ प्रभारी का दायित्व सौंप दिया.
इसके अलावा सांत्वना जेना के वेतन में 30 प्रतिशत की वृद्धि (इंक्रीमेंट) को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. लोग जानना चाहते हैं कि यह वृद्धि किस आदेश के आधार पर दी गई और इसे किस सक्षम प्राधिकारी ने अनुमोदित किया.
विभागीय सूत्रों के अनुसार, पिछले लगभग 16 वर्षों में जिले में पदस्थापित किसी भी जिला शिक्षा पदाधिकारी या जिला शिक्षा अधीक्षक ने उन्हें बीपीओ प्रभारी का दायित्व नहीं सौंपा था. ऐसे में वर्तमान डीईओ कैलाश मिश्रा के इस निर्णय को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. कुछ लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि प्रभारी बनाए जाने के बाद मिठाइयां बांटी गईं. हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
उल्लेखनीय है कि सांत्वना जेना की सेवा से जुड़े मामलों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं. अब लोगों की मांग है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी पूरे मामले में सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करें कि किन नियमों, विभागीय आदेशों और सरकारी स्वीकृतियों के आधार पर सांत्वना जेना को बीपीओ प्रभारी बनाया गया, वेतन वृद्धि प्रदान की गई और वर्तमान तक उनकी सेवाएं जारी रखी गईं.
प्रमोद सिंह (संपादक)





