
आदित्यपुर: जमशेदपुर के डीडी बार हत्याकांड में मारे गए करणी सेना के सरायकेला- खरसावां युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष हिमांशु सिंह की तेरहवीं पर रविवार को आदित्यपुर स्थित उनके आवास पर करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज सिंह शेखावत और महिला इकाई की राष्ट्रीय अध्यक्ष संगीता सिंह पहुंचे. दोनों नेताओं ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर सांत्वना दी और सरकार को 30 अगस्त तक का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं हुई तो करणी सेना राज्यव्यापी आंदोलन करेगी.


इस दौरान करणी सेना नेताओं ने मांग की कि पूरे मामले की जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश (रिटायर्ड जज) की निगरानी में गठित विशेष जांच दल (SIT) से कराई जाए. साथ ही हिमांशु सिंह और घायल प्रत्युष सिंह के परिवार को आजीवन सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए तथा दोषियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर फांसी या उम्रकैद जैसी कठोर सजा दिलाई जाए.
करणी सेना की महिला इकाई की राष्ट्रीय अध्यक्ष संगीता सिंह ने कहा कि यह केवल एक परिवार का नहीं बल्कि पूरे समाज के सम्मान और कानून व्यवस्था का मामला है. उन्होंने कहा कि जब तक दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिलती, करणी सेना पीछे हटने वाली नहीं है. उन्होंने हिमांशु सिंह और घायल प्रत्युष सिंह के परिवार की सुरक्षा की गारंटी की भी मांग की.

वहीं करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज सिंह शेखावत ने डीडी बार हत्याकांड को राज्य सरकार और कानून-व्यवस्था की विफलता बताया. उन्होंने कहा कि यदि पुलिस समय पर कार्रवाई करती तो यह घटना नहीं होती. उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिस किसी की भी भूमिका सामने आए, उसके खिलाफ बिना किसी राजनीतिक दबाव के कार्रवाई की जाए.
भाजपा नेता एवं बार संचालक नीरज सिंह का नाम सामने आने के सवाल पर राज सिंह शेखावत और संगीता सिंह ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को पहले से दोषी या निर्दोष घोषित नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने मांग की कि नीरज सिंह सहित जिन-जिन लोगों के नाम इस मामले में आए हैं, उनकी भूमिका की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके.
पिता ने फिर उठाए एफआईआर पर सवाल
हिमांशु सिंह के पिता ने एक बार फिर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि घटना के बाद पुलिस ने उनसे कोरे कागज पर जबरन हस्ताक्षर कराए और बाद में उनकी जानकारी के बिना एफआईआर में आरोपियों के नाम दर्ज कर दिए. उन्होंने कहा कि उनकी मूल शिकायत और दर्ज एफआईआर में अंतर है. उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग दोहराई. उन्होंने कहा कि उनकी मांग अभी भी पूरी नहीं हुई है. उनकी मांग मुख्य आरोपी विश्वनाथ मंडल का एनकाउंटर और उनकी पुत्रवधु को सरकारी नौकरी देने की है.
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि 27 जून की रात जमशेदपुर के डीडी बार में विवाद के बाद बार के बाहर करणी सेना के सरायकेला- खरसावां युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष हिमांशु सिंह और प्रत्युष सिंह पर धारदार हथियार से हमला किया गया. आरोप है कि दोनों को पुलिस वाहन से बाहर निकालने के बाद हमलावरों ने चाकुओं से ताबड़तोड़ वार किए. इस हमले में हिमांशु सिंह की मौत हो गई, जबकि प्रत्युष सिंह गंभीर रूप से घायल हुए और उनका इलाज फिलहाल कोलकाता में चल रहा है.

घटना के बाद जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां में भारी आक्रोश देखने को मिला. मामले में लापरवाही के आरोप में संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले का संज्ञान लेते हुए तत्कालीन जमशेदपुर एसएसपी और सरायकेला- खरसावां की एसपी को हटाकर नए आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति की.
अब तक इस मामले में भाजपा नेता सह बार संचालक नीरज सिंह, विश्वनाथ मंडल, राहुल दुबे सहित 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है. जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही हैं. अब करणी सेना के अल्टीमेटम के बाद इस हाई- प्रोफाइल हत्याकांड में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है. पूरे मामले में सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और जांच की दिशा पर टिकी हैं.





