
चाईबासा: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा स्वास्थ्य कर्मियों और सहियाओं का सब्र अब जवाब दे चुका है. पिछले छह महीने से वेतन और मानदेय नहीं मिलने से नाराज स्वास्थ्य कर्मियों ने चाईबासा सदर अस्पताल और चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है. हड़ताल के कारण जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है और मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.


हड़ताल के दौरान चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल की नर्स शोभा केरकेट्टा की तबीयत अचानक बिगड़ गई. हालत खराब होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है. इसके बावजूद अन्य स्वास्थ्य कर्मियों ने अपना आंदोलन जारी रखा और सरकार के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई.
धरना पर बैठी सहियाओं और स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि सरकार घर पर रहने वाली महिलाओं को मैया सम्मान योजना के तहत हर महीने 2500 रुपये दे रही है, लेकिन जो महिलाएं सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का काम कर रही हैं, उन्हें महीनों से मेहनताना तक नहीं मिल रहा है. कर्मियों ने कहा कि दो हजार रुपये मासिक मानदेय भी समय पर नहीं मिल पा रहा है, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो गया है.
आंदोलनकारी कर्मियों का आरोप है कि वेतन नहीं मिलने से आर्थिक संकट गहरा गया है. कई कर्मी कर्ज लेकर घर चला रहे हैं. हड़ताल में एएनएम, लैब टेक्नीशियन, कंप्यूटर ऑपरेटर, सहिया और चिकित्सकों समेत कुल 103 स्वास्थ्य कर्मी शामिल हैं.
हड़ताल को समर्थन देने पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और भाजपा नेताओं का प्रतिनिधिमंडल भी अस्पताल पहुंचा. मधु कोड़ा ने स्वास्थ्य कर्मियों की मांगों को जायज बताते हुए कहा कि उनकी समस्याओं को राज्यपाल और मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया जाएगा.
स्वास्थ्य कर्मियों की प्रमुख मांगों में छह महीने का लंबित मानदेय और बकाया भुगतान, 8 प्रतिशत वेतन वृद्धि, लंबित बोनस का भुगतान तथा प्रत्येक माह की 5 तारीख तक नियमित मानदेय सुनिश्चित करना शामिल है.
हड़ताल का असर अब अस्पतालों की सेवाओं पर साफ दिखाई देने लगा है. ओपीडी पंजीकरण, टीकाकरण, लैब जांच, डाटा एंट्री, पोषण कार्यक्रम और कई अन्य स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं. स्वास्थ्य कर्मियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
Edited By Sarita






