
सरायकेला: कोल्हान की लाईफलाईन सरायकेला- कांड्रा मार्ग की बदहाल स्थिति और लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं को लेकर एक स्थानीय बुद्धिजीवी ने “इंडिया न्यूज़ वायरल बिहार-झारखंड” को पत्र लिखकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है. पत्र में सड़क की जर्जर हालत को दर्जनों हादसों और कई लोगों की मौत का प्रमुख कारण बताते हुए प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं.


पत्र में कहा गया है कि सरायकेला टोल से कांड्रा टोल तक करीब 35 किलोमीटर लंबी सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों के कारण वाहन चालकों को बार-बार अपनी लेन बदलनी पड़ती है, जिससे आमने-सामने की टक्कर और अन्य सड़क दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है. उनका कहना है कि यह मार्ग अब सड़क कम और मौत का रास्ता ज्यादा बन चुका है.
बुद्धिजीवी ने पत्र में दावा किया है कि पिछले एक माह के दौरान इस मार्ग पर दर्जनों दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और कई लोगों की जान जा चुकी है. इसके बावजूद सड़क की मरम्मत के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है. उन्होंने सवाल उठाया है कि जब सरकार सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों के परिजनों को लाखों रुपये का मुआवजा देने की बात करती है, तो सड़क को सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक राशि खर्च करने में आखिर इतनी देरी क्यों हो रही है.
पत्र में सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर चिंता जताई गई है. उनका कहना है कि सड़क की मार्किंग लगभग मिट चुकी है, कई स्थानों पर चेतावनी संकेतक नहीं हैं और स्पीड मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी बेहद कमजोर है. ऐसे में हादसों की आशंका लगातार बनी रहती है.
बुद्धिजीवी ने जिला प्रशासन से सड़क सुरक्षा समिति की विशेष बैठक बुलाने, उपायुक्त एवं पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों से सार्वजनिक जवाब मांगने तथा सड़क की तत्काल मरम्मत सुनिश्चित करने की मांग की है. साथ ही उन्होंने जिले के अधिवक्ताओं, सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों को एकजुट होकर इस मुद्दे को जनहित का विषय बनाने का सुझाव दिया है.
सबसे गंभीर आरोप पत्र के अंतिम हिस्से में लगाया गया है, जहां उन्होंने दावा किया है कि सड़क की तत्काल मरम्मत के बजाय कथित तौर पर नए टेंडर की प्रक्रिया का इंतजार किया जा रहा है. उनका आरोप है कि यदि यह सही है तो जनता की सुरक्षा से अधिक प्राथमिकता प्रशासनिक प्रक्रियाओं और ठेकेदारी व्यवस्था को दी जा रही है. हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो सड़क हादसों का सिलसिला थमने वाला नहीं है. ऐसे में प्रशासन को केवल दुर्घटनाओं के बाद कार्रवाई करने के बजाय दुर्घटनाओं को रोकने की दिशा में तत्काल और प्रभावी कदम उठाने होंगे.
फिलहाल यह पत्र जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर सरायकेला- कांड्रा मार्ग की बदहाली दूर करने के लिए जिम्मेदार विभाग कब जागेंगे और लोगों को सुरक्षित सड़क कब मिलेगी.
Edited By Sarita






