सरायकेला: जिले का परिवहन विभाग पिछले करीब 20 दिनों से प्रशासनिक संकट का शिकार बना हुआ है. जिला परिवहन पदाधिकारी (डीटीओ) के तबादले के बाद विभागीय कामकाज लगभग ठप पड़ गया है. ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी बुक, वाहन ट्रांसफर, परमिट और नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन जैसे महत्वपूर्ण कार्य लंबित पड़े हैं, जिससे आम जनता से लेकर ऑटोमोबाइल व्यवसायी तक परेशान हैं.


जानकारी के अनुसार डीटीओ का प्रभार डीआरडीए निदेशक अजय कुमार तिर्की को सौंपा गया है, लेकिन उन्हें परिवहन विभाग से जुड़े आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने की अधिकृत शक्ति नहीं मिली है. ऐसे में विभाग में जमा सैकड़ों फाइलें स्वीकृति के इंतजार में अटक गई हैं.
ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले युवाओं और वाहन चालकों को रोज परिवहन कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. टेस्ट और अन्य प्रक्रियाएं पूरी होने के बावजूद लाइसेंस जारी नहीं हो पा रहे हैं. वहीं नए वाहन खरीदने वाले लोग भी आरसी और रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों के लिए इंतजार करने को मजबूर हैं.
इस प्रशासनिक गतिरोध का असर जिले के ऑटोमोबाइल कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है. वाहन डीलरों का कहना है कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया बाधित होने से नए वाहनों की डिलीवरी प्रभावित हो रही है और कारोबार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विभाग का प्रभार किसी अधिकारी को दिया गया है, तो उन्हें आवश्यक अधिकार क्यों नहीं दिए गए. आखिर प्रशासनिक समन्वय की कमी का खामियाजा जनता और व्यवसायियों को क्यों भुगतना पड़ रहा है ?
जनप्रतिनिधियों और व्यवसायिक संगठनों ने राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन से मांग की है कि परिवहन विभाग में उत्पन्न इस संकट का तत्काल समाधान किया जाए. लोगों का कहना है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं हुई तो लंबित मामलों का बोझ और बढ़ेगा तथा जनता की परेशानी भी कई गुना बढ़ जाएगी.
फिलहाल सरायकेला का परिवहन विभाग ऐसे जहाज की तरह दिखाई दे रहा है, जिसका कप्तान तो मौजूद है, लेकिन उसके हाथ में पतवार नहीं. नतीजा, फाइलें धूल फांक रही हैं और जनता जवाब का इंतजार कर रही है.
रिपोर्ट: प्रमोद सिंह

