जामताड़ा: सीदो- कान्हू मुर्मू यूनिवर्सिटी के संबद्ध जामताड़ा कॉलेज में इस शैक्षणिक सत्र से बंग्ला भाषा की पढ़ाई बंद किए जाने के फैसले को लेकर बंगाली समुदाय में नाराजगी बढ़ गई है. स्थानीय लोगों ने इसे बंग्ला भाषा और संस्कृति पर सीधा हमला बताया है. एक ओर विश्वविद्यालय अगले शैक्षणिक सत्र से फ्रेंच और स्पेनिश जैसी विदेशी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बंगाली बाहुल्य क्षेत्र जामताड़ा में बंग्ला भाषा की पढ़ाई बंद किए जाने से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस बंग्ला भाषा को केंद्र सरकार ने शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया है और जिसे झारखंड में द्वितीय भाषा का सम्मान प्राप्त है, उसी भाषा को शिक्षा व्यवस्था से धीरे- धीरे समाप्त किया जा रहा है. उनका कहना है कि जामताड़ा जैसे क्षेत्र में बंग्ला भाषा जनजीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है.

डी डी भंडारी
बंगाली समाज के लोगों ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, पहचान और परंपरा की आत्मा होती है. जामताड़ा के गांवों और शहरों में आज भी बंग्ला भाषा की मिठास सुनाई देती है. यहां तक कि हिंदी भाषी लोग भी अपनत्व दिखाने के लिए बंग्ला शब्दों का प्रयोग करते हैं.
डॉ. डीडी. भंडारी ने कहा कि झारखंड सरकार का बंग्ला भाषा के प्रति रवैया लंबे समय से उपेक्षापूर्ण रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में बड़ी संख्या में बंग्ला भाषी आबादी होने के बावजूद स्कूलों में न तो पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं. उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी से लेकर हाई स्कूल तक बंग्ला शिक्षा लगभग समाप्त हो चुकी है और अब कॉलेज स्तर पर भी इसे खत्म किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि पहले प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों से बंग्ला पढ़ाई धीरे-धीरे गायब हुई और अब छात्रों की संख्या कम होने का हवाला देकर कॉलेजों से भी विषय हटाया जा रहा है. उनका आरोप है कि सरकार की नीतिगत बेरुखी के कारण ही छात्रों की संख्या घटी है.

महाविद्यालय प्राचार्य
वहीं कौशल यादव ने कहा कि वर्तमान में बंग्ला ऑनर्स में केवल दो छात्र हैं. पिछले तीन वर्षों से भी छात्रों की संख्या बेहद कम रही है. उन्होंने बताया कि 10 मई को कुलपति के साथ हुई ऑनलाइन बैठक में बंग्ला विषय की पढ़ाई बंद करने का निर्णय लिया गया था.
अब बंगाली समुदाय इस फैसले को वापस लेने की मांग कर रहा है. लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्णय वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल



