खरसावां: शिक्षाविद् सह समाजसेवी आलोक दास ने राज्य सरकार द्वारा कॉलेजों में विभिन्न विषयों और पीजी पाठ्यक्रमों को बंद करने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है. प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि यह निर्णय विद्यार्थियों के साथ अन्याय है और उन्हें उच्च शिक्षा से वंचित करने जैसा है.

उन्होंने कहा कि कोल्हान विश्वविद्यालय की अधिसूचना के आधार पर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, झारखंड सरकार द्वारा मॉडल महाविद्यालय सरायकेला- खरसावां में इतिहास, राजनीति शास्त्र, ज्योग्राफी और कंप्यूटर विषय, मॉडल महिला महाविद्यालय में ज्योग्राफी, वाणिज्य एवं कंप्यूटर विषय तथा काशी साहू कॉलेज सरायकेला में पीजी पाठ्यक्रम को वर्तमान शैक्षणिक सत्र से बंद करने की तैयारी की जा रही है.
आलोक दास ने कहा कि सरायकेला-खरसावां जिला आसपास के हजारों गरीब, वंचित और जनजातीय विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र है. ऐसे में विषयों को बंद किए जाने से विद्यार्थियों को 20 से 30 किलोमीटर दूर पढ़ाई के लिए जाना पड़ेगा, जिससे कई छात्र-छात्राएं शिक्षा से दूर हो सकते हैं.
उन्होंने कहा कि यह केवल सरायकेला-खरसावां की समस्या नहीं, बल्कि पूरे कोल्हान क्षेत्र के गरीब विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है. नई शिक्षा नीति में बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा देने की बात कही गई है, लेकिन कला, वाणिज्य, विज्ञान और वोकेशनल संकाय के विषयों को बंद करना नीति की मूल भावना के विपरीत है. उन्होंने यह भी कहा कि पहले ही महाविद्यालयों में इंटरमीडिएट स्तर की पढ़ाई बंद करने के बाद सरकार समुचित वैकल्पिक व्यवस्था देने में विफल रही है. अब उच्च शिक्षा स्तर पर इस प्रकार का निर्णय शिक्षा व्यवस्था को और कमजोर करेगा. आलोक दास ने शिक्षा विभाग के सचिव राहुल पुरवार से राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस पहल करने की मांग की. साथ ही राज्यपाल से इस प्रस्तावित निर्णय में हस्तक्षेप कर इसे तत्काल निरस्त करने की अपील की है.



