सरायकेला/ Pramod Singh जिले के शिक्षा विभाग में कोषागार नियमों की अनदेखी का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है. विभागीय आदेशों के विपरीत एक ही कर्मी को दोबारा उसी संवेदनशील पद पर तैनात किए जाने से भ्रष्टाचार के आरोप और तेज हो गए हैं.

जानकारी के अनुसार, विभाग द्वारा स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि विपत्र लिपिक, लेखापाल, विपत्र प्रभारी और कोषागार वाहक जैसे पदों पर तीन वर्ष से अधिक समय तक किसी भी कर्मी को नहीं रखा जाएगा. इसके बावजूद सरायकेला प्रखंड शिक्षा कार्यालय में कार्यरत कामिनी कांत मेहता को फिर से मैसेंजर पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई, जबकि वे पहले से ही तीन वर्षों तक इसी पद पर तैनात रह चुके हैं.
इस निर्णय को लेकर शिक्षकों के बीच भारी नाराजगी देखी जा रही है. कई शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि नियमों की अनदेखी कर इस नियुक्ति के पीछे पैसों के लेन- देन की आशंका है. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामला सामने आने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं.
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी दिनेश दंडपात ने सफाई देते हुए कहा कि शिक्षकों की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर यह निर्णय लिया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में जिला शिक्षा अधीक्षक से चर्चा कर आगे की कार्रवाई की जाएगी और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा.
इधर, जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय द्वारा हाल ही में वेतन निकासी प्रक्रिया को लेकर सख्त निर्देश जारी किए गए हैं. बिना सेवा पुस्तिका, बायोमैट्रिक उपस्थिति और आवश्यक दस्तावेजों के सत्यापन के किसी भी वेतन बिल को कोषागार में जमा नहीं करने का आदेश दिया गया है. साथ ही अन्य जिलों से आए शिक्षकों के दस्तावेजों के मिलान को भी अनिवार्य किया गया है.
एक तरफ विभाग पारदर्शिता और जवाबदेही की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर नियमों की अनदेखी से भ्रष्टाचार के आरोपों को बल मिल रहा है. अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या दोषियों पर सख्ती दिखाई जाती है या नहीं.

