चाईबासा/ Jayant Pramanik नो एंट्री आंदोलन को लेकर कोल्हान क्षेत्र की सियासत और तेज हो गई है. शुक्रवार को नो एंट्री आंदोलन समिति के प्रतिनिधियों ने रांची स्थित लोकभवन में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर अपनी मांगों को विस्तार से रखा.

इस दौरान समिति ने चाईबासा क्षेत्र में नो एंट्री व्यवस्था लागू करने, ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने और न्यायपूर्ण अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की. प्रतिनिधियों ने राज्यपाल को क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, ग्रामीणों की समस्याओं और आंदोलन के औचित्य से अवगत कराया.
मुलाकात के दौरान राज्यपाल ने समिति की बातों को गंभीरता से सुना और सकारात्मक रुख अपनाया. उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर जल्द समाधान निकालने का भरोसा दिया. साथ ही उन्होंने पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त चंदन कुमार से फोन पर बात कर स्थिति की जानकारी ली और जल्द कार्रवाई का निर्देश दिया. परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया.
राज्यपाल से मुलाकात के बाद समिति के संयोजक रमेश बालमुचू ने बताया कि सकारात्मक प्रतिक्रिया से उम्मीद जगी है कि ग्रामीणों की लंबे समय से लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लिया जाएगा.
क्या है मामला
चाईबासा शहर के बाईपास एमडीआर-177 पर सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नो एंट्री लागू करने की मांग को लेकर 27 सितंबर 2025 को तंबो चौक में बड़ा जुटान हुआ था. इस दौरान आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प भी हुई थी. बाद में मंत्री आवास के पास धरना, सरकारी कार्य में बाधा और पथराव के आरोप में 16 लोगों को जेल भेजा गया, जबकि 73 नामजद और 500 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया.
समिति की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं. एमडीआर-177, एएच-75ई और एनएच-220 पर नो एंट्री नियम लागू किया जाए. घायलों को उचित इलाज और मुआवजा दिया जाए. लाठीचार्ज की निष्पक्ष न्यायिक जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो. जनता की मांगों के समाधान के लिए स्थायी तंत्र विकसित किया जाए.
आगे की रणनीति
समिति ने घोषणा की है कि 26 अप्रैल से 1 मई तक चाईबासा से रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास तक पैदल न्याय यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल होंगे. समिति ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा.

