सरायकेला/ Report By Pramod Singh कला नगरी सरायकेला की सांस्कृतिक धड़कन एक बार फिर जीवंत हो उठी, जब बिरसा मुंडा स्टेडियम में राजकीय चैत्र पर्व सह- छऊ महोत्सव का भव्य शुभारंभ पारंपरिक विधि- विधान के साथ किया गया. ढोल- नगाड़ों की गूंज, मंत्रोच्चार और लोक आस्था के बीच पूरी “कलानगरी” छऊ की लय पर झूम उठी.

11 से 13 अप्रैल तक आयोजित होनेवाले इस महोत्सव का उद्घाटन सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र की सांसद जोबा मांझी ने पारंपरिक पूजा- पाठ और रीति- रिवाजों के साथ किया. शुभारंभ के साथ ही मंच पूरी तरह सांस्कृतिक रंग में रंगा नजर आया, जहां छऊ कलाकारों की प्रस्तुतियों ने माहौल को रोमांचक बना दिया.

अपने संबोधन में सांसद जोबा मांझी ने कहा कि छऊ केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि हमारी पहचान, विरासत और पूर्वजों की आत्मा है. उन्होंने कहा कि सरायकेला की धरती ने इस कला को जन्म दिया और आज यह वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बना चुकी है.
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है. कलाकारों को बेहतर मंच, संसाधन और सम्मान मिलना चाहिए, ताकि वे देश- विदेश में भारतीय संस्कृति का परचम लहरा सकें.
कार्यक्रम में उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लुणायत, जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा, आदित्यपुर नगर निगम के महापौर संजय सरदार और नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे.

तीन दिवसीय इस महोत्सव में सरायकेला, मानभूम और खरसावां शैली के छऊ नृत्य दल अपनी प्रस्तुति देंगे, जिसमें दर्शकों को लोक संस्कृति की विविधता और समृद्ध परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिलेगा.
राजकीय छऊ महोत्सव का यह भव्य आगाज़ यह संदेश देता है कि सरायकेला की सांस्कृतिक विरासत आज भी जीवंत है और हर वर्ष नई ऊर्जा के साथ दुनिया के सामने अपनी पहचान मजबूत कर रही है.

