आदित्यपुर. नगर निगम क्षेत्र में जमीन माफिया बेखौफ होकर सरकारी भूमि को कौड़ियों के भाव बेच रहे हैं और लाखों रुपये की उगाही कर रहे हैं. सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि नगर निगम, स्थानीय पुलिस और अंचल प्रशासन इस गंभीर मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं. मामला नगर निगम के वार्ड 23 स्थित कल्पनापुरी सोसाइटी का है, जहां उसी वार्ड में नगर निगम का कार्यालय भी मौजूद है. स्थानीय लोगों ने कई बार नगर निगम, आदित्यपुर थाना और गम्हरिया अंचल कार्यालय को लिखित शिकायत दी, लेकिन कार्रवाई के बजाय जमीन माफिया खुलेआम करोड़ों की सरकारी जमीन को औने-पौने दाम में बेच रहे हैं.

सोसायटी वासियों ने आरोप लगाया है कि लगभग 1200 वर्गफुट सरकारी भूमि पर असामाजिक तत्वों ने जबरन कब्जा कर लिया है. बताया गया है कि प्लॉट संख्या 216 (नया 813) पर सीमेंट के खंभे खड़े कर और दीवार बनाकर पूरी जमीन को घेर दिया गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह भूमि वर्षों से छोटे सामाजिक आयोजनों, बच्चों के खेलने और दुर्गा मंदिर से जुड़े कार्यक्रमों के लिए उपयोग में आती रही है. यह क्षेत्र की अंतिम बची हुई सार्वजनिक जगह मानी जाती है.
निवासियों ने यह भी बताया कि इससे पहले भी इस स्थान पर दो सरकारी प्लॉटों पर अवैध निर्माण कर कब्जा किया जा चुका है. विरोध करने पर उन्हें धमकियां दी गईं और मारपीट की नौबत भी आ गई. स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप कर भूमि माफियाओं द्वारा किए गए अवैध कब्जे को हटाए और सरकारी संपत्ति को बचाए.
लोगों का कहना है कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो सरकार को राजस्व की भारी क्षति होगी. अब बड़ा सवाल यह है कि इतनी गंभीर शिकायतों के बावजूद स्थानीय पुलिस, नगर निगम और अंचल प्रशासन चुप क्यों है ? दो दिन पहले आकाशवाणी केंद्र के पास घेराबंदी मामले में निगम प्रशासन ने तेजी दिखाई, लेकिन अपनी नाक के नीचे हो रहे बड़े पैमाने पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे पर खामोशी कई सवाल खड़े कर रही है. इस खुलासे के बाद नगर निगम की कार्यशैली पर उंगली उठनी तय है. अब देखना यह होगा कि आगे प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है.

