आदित्यपुर: नगर निगम के पूर्व पार्षदों द्वारा शनिवार को शुरू हुआ आमरण अनशन डीसी नितीश कुमार सिंह के पहल पर देर शाम समाप्त जरूर हो गया है मगर इस पूरे प्रकरण में नगर आयुक्त रवि प्रकाश की भूमिका एकबार फिर से सवालों के घेरे में आ गई है.

दरअसल यह अनशन नगर आयुक्त के तानाशाही और नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ था. पूर्व पार्षदों की मुख्य मांगे मात्र यही थी कि उनके वार्डों की समस्याओं को नगर आयुक्त तरजीह नहीं देते. यदि उनसे मिलने निगम कार्यालय जाते हैं तो गार्ड द्वारा उन्हें गेट पर ही रोक दिया जाता है. जबकि चहेते ठेकेदारों को बेरोकटोक जाने दिया जाता है. वार्ड की कई एसी योजनाएं हैं जिसका शिलान्यास होने के बाद आजतक टेंडर नहीं निकाला गया है जिससे जनता में उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ती जा रही है. कुल मिलाकर यदि वार्ड 17 के जयप्रकाश उद्यान सड़क का मामला यदि छोड़ दिया जाए तो समस्या इतनी गंभीर नहीं थी कि पूर्व पार्षदों को आमरण अनशन करना पड़े, मगर नगर आयुक्त के तानाशाही रवैया से पूर्व पार्षद इतने त्रस्त हो चुके थे कि उन्हें इतना बड़ा कदम उठाना पड़ा.
मजे की बात तो यह रही कि एक ओर पार्षद आमरण अनशन पर बैठे दूसरी ओर प्रशासक लंबी छुट्टी पर निकल गए. न तो उन्होंने अनशन पर बैठे पूर्व पार्षदों से मुलाकात की ना ही उन्हें भरोसा दिलाया, जिससे पार्षदों एवं उनके समर्थकों में घर नाराजगी देखी गई. उनकी चमचमाती लग्जरी गाड़ी अनशन स्थल से जैसे ही गुजरा कि आंदोलन कर रही भीड़ ने “प्रशासक मुर्दाबाद” “नगर निगम चोर है” जैसे नारे लगाना शुरू कर दिया. नगर निगम के अबतक के कार्यकाल में इतनी बेज्जती किसी प्रशासक कि नहीं हुई थी.
लोगों का गुस्सा इस बात को लेकर भी था कि जब पूर्व से पार्षदों द्वारा आमरण अनशन की घोषणा की गई थी तब भी निगम कार्यालय के आसपास गंदगी का घर अंबार लगा हुआ छोड़ दिया गया. बजबजाती गंदगी और बदबू के बीच पार्षदों ने आमरण अनशन शुरू किया. हालांकि बाद में लोगों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए अनशन स्थल के आसपास सफाई कराई गई और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया गया. जैसे- जैसे समय बीतता गया वैसे-वैसे पार्षदों के समर्थक अनशन स्थल पर जुटने लगे. इस बीच उपायुक्त की ओर से पूर्व पार्षदों के नाम एक संदेश आया जिसमें उन्होंने जयप्रकाश उद्यान सड़क को लेकर आ रहे अड़चनो को दूर करते हुए तकनिकी स्वीकृति के लिए संबंधित विभाग को आदेश देने की बात कही. साथ ही पूर्व पार्षदों की मांगों को गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया. और उनके मान- सम्मान की रक्षा करने का भरोसा दिलाया. उनका संदेश लेकर उपनगर आयुक्त पारुल सिंह अनशन स्थल पर पहुंची 2- 3 दौर की वार्ता के बाद इस शर्त पर पूर्व पार्षदों ने अनशन समाप्त किया कि सोमवार को उनकी मांगों को नगर निगम के पदाधिकारी के साथ बैठकर सुनी जाएगी एवं समस्याओं के समाधान के लिए बीच का रास्ता निकाला जाएगा. इसपर उपनगर आयुक्त ने हामी भरते हुए सोमवार का समय दिया तब जाकर आंदोलन कर रहे पार्षदों ने अपना अनशन समाप्त किया.
इसी दौरान नगर निगम कार्यालय के इर्द-गिर्द फैले गंदगी को लेकर स्थानीय लोगों का आक्रोश भी फूट पड़ा और अनशन स्थल पर पहुंचकर निगम प्रशासन को खूब खरी- खोटी सुनाई. इस पर उपनगर आयुक्त ने उनके प्रतिनिधि को भी सोमवार को बैठक में शामिल करने का आश्वासन दिया. उपनगर आयुक्त ने जिस तरह से लोगों के आक्रोश को शांत किया उसकी जमकर सराहना हो रही है. स्थानीय लोग मौके पर यह भी कहते सुने गए कि “गलत पदाधिकारी के हाथों में नगर निगम की कमान है. उनके जगह उपनगर आयुक्त पारुल सिंह को प्रशासक होना चाहिए था”.
कुल मिलाकर कहे तो सरायकेला उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह ने नगर निगम क्षेत्र में अघोषित राजनीति को अपनी कुशल प्रशासनिक क्षमता के बूते टाल दिया. आमरण अनशन पर बैठे पूर्व पार्षदों ने उपायुक्त और उप नगर आयुक्त के प्रति जहां आभार जताया, वहीं नगर आयुक्त के रवैये पर घोर नाराजगी जताई.
आमरण अनशन पर बैठे पूर्व पार्षदों में वार्ड 17 की पूर्व पार्षद नीतू शर्मा, वार्ड 18 के पूर्व पार्षद रंजन सिंह, वार्ड 2 के पूर्व पार्षद अभिजीत महतो, वार्ड 12 के पूर्व पार्षद विक्रम किस्कू, वार्ड 14 के पूर्व पार्षद बोरजो राम हांसदा, वार्ड 6 की पूर्व पार्षद ममता बेज, वार्ड 31 की पूर्व पार्षद रिंकू राय, वार्ड 23 की पूर्व पार्षद जूली महतो शामिल थीं. अन्य पूर्व पार्षदों ने भी इन्हें अपना नैतिक समर्थन दिया. वहीं कई सामाजिक संगठनो ने भी आंदोलन में अपना समर्थन दिया. जबकि अनशन स्थल पर समाजसेवी अभय झा वरिष्ठ कांग्रेसी जगदीश नारायण चौबे, सामाजिक कार्यकर्ता रंजीत सांडिल, क्षेत्र के जाने-माने चिकित्सक डॉक्टर अशोक कुमार, कांग्रेसी नेता संतोष सिंह, आजसू नेता और पूर्व पार्षद महेश्वर महतो सहित सैकड़ो लोगों ने अपना नैतिक समर्थन दिया और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर घर नाराजगी जताई.

