सरायकेला: सरायकेला सदर अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर झारखंड विधानसभा की प्राक्कलन समिति ने कड़ा रुख अपनाया है. अस्पताल निरीक्षण के दौरान सामने आई अव्यवस्थाओं पर समिति के अध्यक्ष हेमलाल मुर्मू ने सिविल सर्जन को फटकार लगाते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने और मरीजों को समय पर बेहतर इलाज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. इस दौरान सरायकेला नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में व्याप्त खामियों को प्रमुखता से उठाया.


निरीक्षण के दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने चिकित्सकों की अनुपलब्धता, आपातकालीन सेवाओं में लापरवाही और मरीजों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने जैसे गंभीर मुद्दों पर समिति का ध्यान आकृष्ट कराया. उन्होंने कहा कि जब सरकार अस्पतालों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है और चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की व्यवस्था के लिए संसाधन उपलब्ध करा रही है, तो फिर आम मरीजों को समय पर इलाज के लिए दर-दर क्यों भटकना पड़ रहा है.
उन्होंने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का वास्तविक लाभ गरीब और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना चाहिए. मरीजों को इलाज के लिए जमशेदपुर, रांची और अन्य शहरों का रुख करने के लिए मजबूर होना पड़े, यह स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर कमी को दर्शाता है.
मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि सदर अस्पताल किसी भी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ होता है. जब जिला मुख्यालय स्थित अस्पताल में ही मरीजों को समुचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिलती है, तो ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है. उन्होंने अस्पताल में सभी प्रमुख विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे शहरों में नहीं जाना पड़े.
आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं पर सवाल उठाते हुए नगर पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि अस्पताल पहुंचने वाले प्रत्येक मरीज को चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों से त्वरित उपचार और सहयोग की उम्मीद रहती है. ऐसे में आपातकालीन सेवाओं में लापरवाही और मरीजों के परिजनों के साथ कथित दुर्व्यवहार गंभीर चिंता का विषय है. चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को केवल अपनी ड्यूटी पूरी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मरीजों के प्रति संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए.
उन्होंने एंबुलेंस सेवा की बदहाल स्थिति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि गंभीर मरीजों को समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होना स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी खामी है. आपातकालीन परिस्थितियों में कुछ मिनटों की देरी भी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है. इसके बावजूद मरीजों और उनके परिजनों को एंबुलेंस के लिए इंतजार करना पड़े, तो यह व्यवस्था की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है. उन्होंने एंबुलेंस की पर्याप्त उपलब्धता, नियमित संचालन और आपातकालीन कॉल पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की.
मनोज चौधरी ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार संसाधन उपलब्ध करा रही है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की उदासीनता के कारण मरीजों को बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल पाती हैं. इसका सीधा असर आम जनता के सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर विश्वास पर पड़ता है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा कोई एहसान नहीं, बल्कि आम नागरिकों का अधिकार है. गरीब परिवारों के लिए सरकारी अस्पताल ही इलाज का सबसे बड़ा सहारा है. ऐसे में अस्पताल की व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
उन्होंने प्राक्कलन समिति से आग्रह किया कि सदर अस्पताल की व्यवस्था में सुधार के साथ पूरे सरायकेला-खरसावां जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित समीक्षा की जाए. चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता, दवाइयों, जांच सुविधाओं, चिकित्सा उपकरणों और एंबुलेंस की स्थिति की निगरानी के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए, ताकि सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का वास्तविक लाभ आम लोगों तक पहुंच सके.
अस्पताल निरीक्षण के दौरान सामने आई खामियों को गंभीरता से लेते हुए प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष हेमलाल मुर्मू ने सिविल सर्जन और अस्पताल उपाधीक्षक को स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार लाने, चिकित्सकीय सेवाओं को व्यवस्थित करने तथा मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. समिति ने स्पष्ट किया कि अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं को प्रभावी बनाने और मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए.
इस दौरान प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष हेमलाल मुर्मू, सदस्य जगन्नाथ महतो एवं सोमेश सोरेन सहित जिले के संबंधित अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी उपस्थित थे.
नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि सरकारी अस्पतालों की पहचान वहां उपलब्ध संसाधनों से नहीं, बल्कि इस बात से होनी चाहिए कि जरूरत के समय आम मरीज को कितनी तत्परता और सम्मान के साथ इलाज मिलता है. गरीब मरीजों को इलाज के अभाव में दूसरे शहरों में भटकना पड़े, यह किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है. स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार केवल कागजों और बैठकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका असर अस्पताल पहुंचने वाले प्रत्येक मरीज को दिखना चाहिए.
प्रमोद सिंह (संपादक)

