सरायकेला: ढाक की गूंज, मां के जयकारे, चेहरे पर सिंदूर की लालिमा और आंखों में विदाई की नमी इन भावपूर्ण दृश्यों के बीच सरायकेला में मां दुर्गा को अगले वर्ष फिर आने के वादे के साथ विदाई दी गई. विजयादशमी के अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला में हिस्सा लेकर माता रानी के प्रति अपनी श्रद्धा और अटूट आस्था प्रकट की.


पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा और हर ओर मां दुर्गा के जयकारे गूंजते रहे.
सिंदूर खेला के दौरान सुहागिन महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर उनके सुखी, समृद्ध और मंगलमय जीवन की कामना की. इसके बाद महिलाओं ने एक-दूसरे के माथे और चेहरे पर सिंदूर लगाकर प्रेम, सौहार्द और अखंड सुहाग का संदेश दिया. लाल सिंदूर से रंगे चेहरों के बीच हंसी-खुशी के पल भी दिखे, लेकिन मां की विदाई की घड़ी आते ही माहौल भावुक हो गया.
महिलाओं की आस्था में एक ही भाव झलक रहा था मां, अपने भक्तों पर कृपा बनाए रखना, घर-परिवार में सुख-शांति रखना और अगले वर्ष फिर इसी उल्लास के साथ दर्शन देने आना.
सरायकेला की दुर्गापूजा में परंपरा और आस्था का यह संगम एक बार फिर देखने को मिला. सिंदूर खेला ने जहां महिलाओं के बीच अपनापन और सामाजिक एकता को मजबूत किया, वहीं मां दुर्गा की विदाई ने भक्तों के मन में विरह और अगले आगमन की प्रतीक्षा छोड़ दी.
मां दुर्गा की विदाई के साथ पंडालों की रौनक भले ही विदा हो गई, लेकिन भक्तों के हृदय में उनकी भक्ति और अगले वर्ष आगमन की उम्मीद बरकरार है. मां के जयकारों के बीच भक्तों ने भावपूर्ण मन से कहा मां, अगले बरस फिर आना.
प्रमोद सिंह (संपादक)

