सरायकेला: सरायकेला Editorial जिले में आगामी शहरी निकाय चुनाव से पहले ही झामुमो की राजनीतिक रणनीति सवालों के घेरे में आ गई है. रविवार को आनन- फानन में झामुमो जिला कमेटी द्वारा तीनों निकायों के मेयर, अध्यक्ष और वार्ड पार्षद प्रत्याशियों के नामों की घोषणा को लेकर सियासी भूचाल मच गया है.

झामुमो इसे भले ही मास्टर स्ट्रोक बता रही हो, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे पार्टी की हताशा और असमंजस भरा फैसला मान रहे हैं. हालात यह हैं कि घोषणा के बाद पार्टी के अंदरखाने में ही बगावत के सुर तेज हो गए हैं.
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिन शहरी निकायों में चुनाव पार्टी आधार पर होना ही नहीं है, वहां झामुमो ने इतनी जल्दबाज़ी क्यों दिखाई. दावा किया जा रहा है कि पार्टी ने ऐसे कई पूर्व पार्षदों के नाम भी अपनी सूची में शामिल कर लिए, जिनका न झामुमो से कोई औपचारिक जुड़ाव है और न ही उन्होंने चुनाव लड़ने की सार्वजनिक घोषणा की है.
इस फैसले से कई पूर्व पार्षदों और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है. पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रत्याशियों की घोषणा से पहले न तो जमीनी स्तर पर रायशुमारी की गई और न ही संगठन के निचले ढांचे को विश्वास में लिया गया.
इतना ही नहीं, महागठबंधन के सहयोगी दल कांग्रेस और राजद को भी इस निर्णय से पूरी तरह अंधेरे में रखा गया. घोषणा के बाद कांग्रेस- राजद खेमे में भी असहजता और खलबली का माहौल बना हुआ है.
गोपनीय सूत्रों के अनुसार झामुमो के कुछ प्रभावशाली नेताओं ने सीमित दायरे में बैठकर यह फैसला लिया है, जिससे पार्टी के भीतर अंतर्कलह उभरे और इसका राजनीतिक लाभ भविष्य में साधा जा सके. पार्टी सूत्रों का यह भी दावा है कि जिन प्रत्याशियों के नाम मेयर और अध्यक्ष पद के लिए घोषित किए गए हैं, उनके साथ ही अंदरखाने में सबसे बड़ा राजनीतिक खेल खेला जा रहा है. आशंका जताई जा रही है कि चुनाव के दौरान वही नेता अन्य दलों के प्रत्याशियों के साथ मिलकर विश्वासघात कर सकते हैं.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शहरी निकाय चुनाव में जातीय समीकरण, स्थानीय पकड़, सामाजिक स्वीकार्यता और व्यक्तिगत छवि जैसे कई कारक अहम होते हैं. ऐसे में बिना गंभीर मंथन और जमीनी फीडबैक के प्रत्याशियों की घोषणा करना खुद अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है.
विश्लेषकों की राय में सरायकेला झामुमो ने चुनाव मैदान में उतरने से पहले ही खुद को कमजोर स्थिति में खड़ा कर लिया है, जो पार्टी की राजनीतिक हताशा को उजागर करता है. अब सबसे दिलचस्प सवाल यह है कि आदित्यपुर नगर निगम, सरायकेला नगर पंचायत और कपाली नगर परिषद में यह राजनीतिक प्रयोग झामुमो के लिए मास्टर स्ट्रोक साबित होगा या आत्मघाती फैसला.
गौरतलब है कि झारखंड में शहरी निकाय चुनाव को लेकर अभी तक कोई औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है और न ही यह चुनाव पार्टी आधारित होना है. इसके बावजूद सरायकेला झामुमो द्वारा सबसे पहले नामों की घोषणा करना कई अनसुलझे सवाल छोड़ गया है.

