सरायकेला: सरायकेला अनुमंडल प्रशासन की कार्यशैली एक बार फिर विवादों में है. जमीन विवाद से जुड़े एक मामले में प्रशासन ने पहले बिना निष्पक्ष जांच किए आवेदिका शांति चटर्जी को कब्जा दिलाने का आदेश जारी कर दिया. लेकिन जैसे ही हाईकोर्ट का डर सताने लगा, प्रशासन अपने ही आदेश से पलट गया और कब्जाधारी को बेदखल करने के लिए दंडाधिकारी व पुलिस बल की टीम भेज दी.

शनिवार शाम को प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी गम्हरिया के सर्कल इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार सिंह पुलिस बल के साथ स्थल पर पहुंचे, जहां एसडीओ के पूर्व के आदेश से रह रहीं शांति चटर्जी ने टीम का कड़ा विरोध किया. विरोध इतना तीव्र था कि दंडाधिकारी और पुलिसकर्मी बिना कार्रवाई किए वापस लौटने को मजबूर हो गए. शांति चटर्जी ने बताया कि बिना कोर्ट के आदेश का वह मकान खाली नहीं करेगी. 24 नवंबर सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई है. हाईकोर्ट में मैं अपना पक्ष रखूंगी.
दस्तावेज़ों के अनुसार, यह मामला ओरिजिनल सूट नंबर 10/2015 से जुड़ा है, जिसे लेकर न्यायालय ने कई दिशानिर्देश जारी किए थे. इसके बावजूद 20 अगस्त 2025 और फिर 28 अगस्त 2025 के आदेशों की गलत व्याख्या के आधार पर अनुमंडल कार्यालय ने आवेदिका के पक्ष में तेज़ी से आदेश जारी कर दिया. बाद में यह स्पष्ट हुआ कि आदेश को गलत समझाकर कार्यान्वित करने की कोशिश की गई है. प्रकरण उजागर होते ही एसडीओ कार्यालय ने नया आदेश जारी कर कब्जाधारी शांति चटर्जी को घर से बेदखल करने के लिए प्रशासनिक टीम भेज दी. लेकिन मौके पर पहुंचे दंडाधिकारी को विरोध के कारण खाली हाथ लौटना पड़ा.
अब मामला फिर से उच्च अधिकारियों के स्तर पर पहुंच गया है. स्थानीय ग्रामीणों व सूत्रों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर बिना सटीक जांच, स्थलीय निरीक्षण और दस्तावेज़ों की पुष्टि किए जल्दबाज़ी में आदेश जारी कर दिया गया, जिसके बाद स्थिति और उलझ गई है.
अब सवाल यह है कि आखिर इस पूरे विवाद में गलती किसकी है ? आवेदिका की, कब्जाधारी का या प्रशासन की जल्दबाज़ी भरी कार्यशैली की.

