DESK REPORT सहारा- सेबी विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू किए गए CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल के जरिए देशभर के निवेशकों को भुगतान की प्रक्रिया जारी है. सहकारिता मंत्रालय द्वारा जारी जनवरी 2026 तक की ताजा राज्यवार रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. रिपोर्ट के अनुसार पूरे देश में अब तक 1 करोड़ 43 लाख 75 हजार 313 आवेदन प्राप्त हुए, जबकि 39 लाख 46 हजार 550 आवेदनों को प्रोसेस कर कुल 8,429.42 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक सबसे अधिक भुगतान उत्तर प्रदेश में हुआ है, जहां 35 लाख 66 हजार 550 आवेदन प्राप्त हुए और 2,228.27 करोड़ रुपये निवेशकों के खातों में भेजे गए. इसके बाद बिहार दूसरे स्थान पर है, जहां 28 लाख 657 आवेदन के बदले 1,892.89 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. ओडिशा को 707.56 करोड़, राजस्थान को 604.44 करोड़ और पश्चिम बंगाल को 397.04 करोड़ रुपये लौटाए गए.
वहीं झारखंड की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई दी. रिपोर्ट के अनुसार झारखंड से 13 लाख 95 हजार 418 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से केवल 3 लाख 73 हजार 588 आवेदन ही प्रोसेस हो सके. अब तक राज्य के निवेशकों को कुल 847.67 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है. जबकि आवेदन संख्या के हिसाब से झारखंड देश के बड़े राज्यों में शामिल है.
झारखंड में कम भुगतान के पीछे एक बड़ी वजह राज्यभर में सहारा के कार्यालयों का बंद होना माना जा रहा है. दरअसल झारखंड सरकार के निर्देश पर पूर्व में सहारा इंडिया के कई कार्यालयों को बंद करा दिया गया था. इसके बाद निवेशकों के आवेदन सत्यापन और दस्तावेज जांच की प्रक्रिया लगभग ठप पड़ गई. बड़ी संख्या में निवेशक अपने मूल दस्तावेज, सदस्यता संख्या, बॉन्ड और भुगतान संबंधित कागजात के सत्यापन के लिए कार्यालयों का चक्कर लगाते रहे, लेकिन कार्यालय बंद रहने से प्रक्रिया प्रभावित होती चली गई.
जानकारों के अनुसार राज्य में सहारा के कुछ पुराने एजेंटों और कार्यकर्ताओं की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही. आरोप है कि निवेशकों को समय पर सही जानकारी नहीं दी गई और कई मामलों में गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आईं. इसी के बाद राज्य के तत्कालीन डीजीपी अनुराग गुप्ता के स्तर से सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे. कई कार्यालय बंद कराए गए और सहारा से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई एवं जेल भेजने की प्रक्रिया भी शुरू हुई. इसका सीधा असर निवेशकों के रिफंड दावों के सत्यापन पर पड़ा.
विशेषज्ञ मानते हैं कि बिहार सहित अन्य राज्यों में जहां कार्यालय और दस्तावेजी सहायता व्यवस्था अपेक्षाकृत सक्रिय रही, वहां आवेदन तेजी से प्रोसेस हुए. जबकि झारखंड में तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं के कारण लाखों आवेदन लंबित रह गए. यही वजह है कि आवेदन संख्या अधिक होने के बावजूद भुगतान के मामले में झारखंड काफी पीछे रह गया.
सहकारिता मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सहारा- सेबी रिफंड खाते से 5,000 करोड़ रुपये केंद्रीय रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज को हस्तांतरित किए गए थे. इसके बाद CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल के माध्यम से डिजिटल और पेपरलेस प्रक्रिया के जरिए भुगतान शुरू किया गया. वर्तमान में सत्यापित दावों पर निवेशकों को 50 हजार रुपये तक की राशि सीधे आधार लिंक्ड बैंक खातों में भेजी जा रही है.
अब झारखंड के लाखों निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि लंबित आवेदनों के सत्यापन और निष्पादन की प्रक्रिया कब तेज होगी. क्योंकि झारखंड के लाखों परिवार आज भी अपनी जमा पूंजी वापस मिलने का इंतजार कर रहे हैं.

