जामताड़ा: जामताड़ा नगर पंचायत की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है. नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता वीरेंद्र मंडल ने प्रेस वार्ता कर वर्तमान नगर पंचायत नेतृत्व पर विकास कार्यों में शिथिलता, सफाई व्यवस्था में लापरवाही और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि परिवर्तन के नाम पर जनता से किए गए वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं. पांच महीने बीत जाने के बावजूद विकास कार्यों का अपेक्षित परिणाम धरातल पर नजर नहीं आ रहा है. उन्होंने वर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष से इस्तीफे की मांग करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की.


पुरानी योजनाओं के सहारे विकास का दावा
वीरेंद्र मंडल ने कहा कि वर्तमान नगर पंचायत के कार्यकाल में अब तक कोई बड़ी नई विकास योजना धरातल पर दिखाई नहीं दी है. शहर में पीसीसी सड़क, स्ट्रीट लाइट और प्रधानमंत्री आवास से संबंधित जो कार्य हो रहे हैं, वे पूर्व कार्यकाल में स्वीकृत या शुरू की गई योजनाओं का हिस्सा हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान नेतृत्व पुरानी योजनाओं का भी प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन नहीं कर पा रहा है. चुनाव के दौरान जनता से पांच महीने का समय मांगा गया था, लेकिन अब तक विकास के मोर्चे पर अपेक्षित उपलब्धि सामने नहीं आई है.
अतिक्रमण अभियान पर उठाए सवाल, पत्र का दिया हवाला
शहर में हाल में चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान पर सवाल उठाते हुए पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि इसे जिला प्रशासन का अभियान बताने के बजाय इसकी वास्तविक प्रक्रिया और जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए. उन्होंने नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी की ओर से अनुमंडल पदाधिकारी को भेजे गए पत्रांक 1018, दिनांक 12 अक्टूबर 2026 का हवाला दिया. उनके अनुसार, पत्र के माध्यम से दो दिवसीय अतिक्रमण मुक्त अभियान के लिए पर्याप्त पुलिस बल और दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति का अनुरोध किया गया था. इसकी प्रतिलिपि थाना प्रभारी, एसडीपीओ और उपायुक्त को भी भेजी गई थी.
वीरेंद्र मंडल ने आरोप लगाया कि दुर्गापूजा जैसे महत्वपूर्ण त्योहार के समय अभियान चलने से छोटे व्यापारियों, ठेला दुकानदारों और स्ट्रीट वेंडरों की आजीविका प्रभावित हुई. उन्होंने अभियान की कार्यप्रणाली और उद्देश्य की जांच कराने की मांग की.
हटिया बंदोबस्ती और कथित अवैध वसूली का मामला उठाया
पूर्व अध्यक्ष ने गुदड़ी हटिया और राजबाड़ी हटिया की बंदोबस्ती के नाम पर कथित अवैध वसूली का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने दावा किया कि इस मामले में पूर्व में तत्कालीन उपायुक्त के निर्देश पर जामताड़ा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. बाद में दोबारा प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई. उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
वेतन नहीं मिलने से सफाई कर्मियों में नाराजगी
वीरेंद्र मंडल ने सफाई कर्मियों के वेतन भुगतान में देरी को लेकर भी नगर पंचायत को घेरा. उन्होंने कहा कि समय पर वेतन नहीं मिलने से सफाई कर्मियों में नाराजगी बढ़ी है और इसका असर शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर पड़ा है. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान सफाई कर्मियों को 30 हजार रुपये मासिक मानदेय और दुर्गापूजा में 10 हजार रुपये अतिरिक्त बोनस देने का वादा किया गया था, लेकिन भुगतान की स्थिति संतोषजनक नहीं है. उन्होंने कहा कि वेतन नहीं मिलने से नाराज सफाई कर्मियों ने सड़कों पर कचरा फेंककर विरोध जताया, जिससे आम नागरिकों को परेशानी हुई. पूर्व में दुर्गापूजा, छठ और दीपावली के दौरान विशेष सफाई अभियान चलाए जाते थे, लेकिन इस बार शहरवासियों को गंदगी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने सफाई कर्मियों के बकाया वेतन का जल्द भुगतान कराने की मांग की.
नगर पंचायत के आय-व्यय की जांच की मांग
नगर पंचायत की वित्तीय व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए वीरेंद्र मंडल ने पिछले सात महीनों के रोकड़ बही, भुगतान संबंधी अभिलेखों और वाउचरों की जांच कराने की मांग की. उन्होंने एक दैनिक कर्मी के नाम पर कथित अनियमित भुगतान, बोर्ड बैठक के खर्च और वाउचर तैयार करने की प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि एक ओर राजस्व की कमी का हवाला देकर सफाई कर्मियों का भुगतान रोके जाने की बात सामने आती है, वहीं दूसरी ओर अन्य मदों में भुगतान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में नगर पंचायत की आय-व्यय संबंधी पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच जरूरी है.
विकास कार्यों में कमीशनखोरी का आरोप
पूर्व अध्यक्ष ने कुछ विकास योजनाओं में कथित तौर पर 35 प्रतिशत पीसी यानी कमीशन मांगे जाने का आरोप लगाया. उन्होंने चिल्ड्रन पार्क के विकास कार्य का उदाहरण देते हुए दावा किया कि कथित कमीशन के कारण संवेदक को नुकसान हुआ और काम बंद करना पड़ा. इसके अलावा उन्होंने जनहित में विज्ञापन के लिए निर्धारित राशि का भुगतान नहीं किए जाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने इन मामलों की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
अध्यक्ष के मानदेय पर भी उठाए सवाल
वीरेंद्र मंडल ने कहा कि नगर पंचायत की बोर्ड बैठक में अध्यक्ष का मानदेय 50 हजार रुपये करने संबंधी प्रस्ताव या निर्णय की चर्चा है, जबकि सफाई कर्मियों के मानदेय और बकाया वेतन भुगतान पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है. उन्होंने इसे नगर पंचायत की प्राथमिकताओं से जुड़ा सवाल बताते हुए कहा कि सबसे पहले कर्मचारियों के बकाया भुगतान और शहर की बुनियादी समस्याओं का समाधान होना चाहिए.
इस्तीफे की मांग, निष्पक्ष जांच पर दिया जोर
प्रेस वार्ता के अंत में वीरेंद्र मंडल ने वर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष से इस्तीफा देने की मांग की. उन्होंने कहा कि विकास कार्यों, सफाई व्यवस्था, छोटे व्यापारियों की आजीविका और वित्तीय पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है. उन्होंने जिला प्रशासन से अतिक्रमण अभियान, हटिया बंदोबस्ती, सफाई कर्मियों के वेतन भुगतान और नगर पंचायत के वित्तीय अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की.
नोट: नगर पंचायत की कार्यप्रणाली, वित्तीय अनियमितताओं और कमीशनखोरी से संबंधित आरोप पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र मंडल की ओर से लगाए गए हैं. इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

