गम्हरिया: सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत जगन्नाथपुर के पूंजी डूंगरी देवनागरी स्थित श्री श्री सार्वजनिक नव दुर्गा पूजा समिति मंदिर परिसर में गुरुवार को मिथिला समाज की ओर से मैथिली साहित्य के महान कवि महाकवि विद्यापति की प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया गया. इस अवसर पर मिथिला समाज के लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला. समारोह श्रद्धा, सांस्कृतिक गौरव और साहित्यिक परंपरा के सम्मान का प्रतीक बना.


अनिल कुमार झा की अध्यक्षता में आयोजित समारोह का शुभारंभ शंकर नाथ झा ने महाकवि विद्यापति के प्रसिद्ध भगवती गीत ‘जय-जय भैरवी’ की प्रस्तुति से किया. इसके बाद पंडित बद्री नारायण झा ने वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई. प्रतिमा अनावरण के दौरान उपस्थित लोगों ने महाकवि विद्यापति को श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके साहित्यिक योगदान को नमन किया.
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जमशेदपुर की पूर्व सांसद एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा की केंद्रीय समिति की सदस्य सुमन महतो शामिल हुईं. उनके अलावा एसएन ठाकुर, अरुणा मिश्रा, वाईके मलिक, आकाश मिश्रा और शिवचंद्र झा सहित कई गणमान्य लोगों ने समारोह में भाग लिया.
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि महाकवि विद्यापति केवल मैथिली साहित्य के महान कवि ही नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य और संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं. उनकी रचनाओं में प्रेम, भक्ति, मानवीय संवेदनाओं और सांस्कृतिक चेतना की गहरी अभिव्यक्ति मिलती है. उनकी प्रतिमा की स्थापना मिथिला की समृद्ध भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है.
वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा, साहित्य और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. महाकवि विद्यापति की प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को उनके जीवन और साहित्यिक योगदान से प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान करेगी.
समारोह में संतोष झा, आशुतोष मिश्रा, प्रमोद झा, सज्जन झा, कमल देव राय, वाल्मीकि सिंह सहित मिथिला समाज के बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे. आयोजन को सफल बनाने में समाज के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. प्रतिमा अनावरण के साथ ही क्षेत्र में मैथिली भाषा और मिथिला की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर उत्साह का माहौल देखने को मिला.
विपिन वार्ष्णेय

