जमशेदपुर: सिदगोड़ा थाना क्षेत्र के शिव सिंह बागान सी रोड में बुधवार को विवादित जमीन को लेकर टाटा स्टील और प्रशासन की कार्रवाई के बाद मामला गरमा गया है. प्रशासन के सहयोग से जमीन को कब्जे से मुक्त कराने की कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया है. कार्रवाई के बाद जमीन पर कब्जा रखने वाले पक्ष की ओर से इसका जोरदार विरोध किया गया है.



बताया जा रहा है कि संबंधित जमीन पर वर्ष 2009 से ही विभिन्न न्यायालयों में विवाद चल रहा है. मनोहर सिंह, मिस्टर पुरी और प्रभाकर सिंह के पक्ष का दावा है कि अब तक जिन न्यायालयों में मामले की सुनवाई हुई है, वहां उनके पक्ष में फैसला आया है. उक्त स्थल पर पिछले चार दशक से लोग घर बनाकर रह रहे है. इसी बीच 20 अगस्त को सिविल कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई निर्धारित थी. आरोप है कि सुनवाई से ठीक पहले बुधवार को प्रशासनिक टीम और टाटा स्टील के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में विवादित स्थल पर बुलडोजर चलाया गया.
कार्रवाई के बाद जमीन पर अपना कब्जा होने का दावा करने वाले पक्ष में आक्रोश फैल गया. उनका आरोप है कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित है, तो ऐसी स्थिति में प्रशासन द्वारा स्थल पर जाकर कार्रवाई किए जाने का औचित्य क्या है.
अधिवक्ता ने कार्रवाई को बताया गंभीर मामला
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं. अधिवक्ता का कहना है कि यदि न्यायालय में मामला लंबित है और संबंधित पक्ष के पक्ष में पूर्व में आदेश पारित हुए हैं, तो प्रशासन द्वारा इस तरह की कार्रवाई किए जाने की न्यायिक जांच आवश्यक है. अधिवक्ता ने इसे न्यायालय की अवमानना से जुड़ा मामला बताते हुए कहा कि इस कार्रवाई के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा. जरूरत पड़ने पर मामला सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाने की भी बात कही गई है.
एसडीओ और डीसी के आदेशों पर भी सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर उठ रहा है. पीड़ित पक्ष का दावा है कि एसडीओ न्यायालय और डीसी न्यायालय से संबंधित मामलों में उनके पक्ष में आदेश पारित हुए हैं. ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि उन्हीं प्रशासनिक अधिकारियों के आदेश पर विवादित स्थल पर कार्रवाई किस आदेश के आधार पर की गई. पीड़ित पक्ष अब संबंधित आदेशों, कार्रवाई की प्रक्रिया और प्रशासन द्वारा अपनाए गए कानूनी आधार को सार्वजनिक किए जाने की मांग कर रहा है.
टाटा स्टील की भूमिका को लेकर भी विरोध
कार्रवाई में टाटा स्टील की भूमिका को लेकर भी विरोध शुरू हो गया है. पीड़ित पक्ष का आरोप है कि टाटा स्टील प्रशासनिक सहयोग लेकर जमीन को खाली कराने पहुंची. हालांकि जमीन के स्वामित्व, कब्जे और प्रशासनिक कार्रवाई का वास्तविक कानूनी आधार संबंधित दस्तावेजों और न्यायालय के आदेशों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.
अब हाईकोर्ट जाने की तैयारी
कार्रवाई के बाद पीड़ित पक्ष ने साफ कर दिया है कि वह कानूनी लड़ाई जारी रखेगा. अधिवक्ता के मुताबिक संबंधित न्यायालयों के आदेश, लंबित मामले और बुधवार को हुई कार्रवाई के दस्तावेजों का अध्ययन किया जा रहा है. इसके बाद उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करने की तैयारी है.
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि जब जमीन का विवाद वर्षों से न्यायालय में चल रहा था और 20 अगस्त को सुनवाई निर्धारित थी, तो उससे पहले विवादित स्थल पर बुलडोजर चलाने का प्रशासनिक आधार क्या था.
इस सवाल का जवाब अब प्रशासन, टाटा स्टील और संबंधित न्यायालयी दस्तावेजों से ही सामने आएगा. मामले ने शहर में जमीन विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायालय में लंबित मामलों के बीच कार्रवाई की सीमा को लेकर नई बहस छेड़ दी है.





