धनबाद: एक रेलकर्मी, जो रोजाना की तरह ड्यूटी से लौट रहा था. न किसी दुश्मनी की जानकारी, न खुद वाहन चलाने की आदत. लेकिन बुधवार देर शाम 5:25 बजे धनबाद पुलिस लाइन के समीप मुख्य सड़क पर वही व्यक्ति बेसुध और बुरी तरह लहूलुहान हालत में पड़ा मिला. सिर में गंभीर चोट थी. आसपास लोगों की भीड़ थी, लेकिन घायल को अस्पताल पहुंचाने की पहल धनबाद के मेयर संजीव सिंह ने की.


घायल रेलकर्मी रंजीत मिश्रा को मेयर ने अपने सरकारी वाहन से निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया. हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए अशर्फी हॉस्पिटल रेफर कर दिया. लेकिन इलाज के दौरान रंजीत मिश्रा की मौत हो गई.
पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया. मामला फिलहाल मौत का है, लेकिन घटनास्थल से सामने आ रही परिस्थितियां इसे महज सड़क दुर्घटना मान लेने से पहले कई सवाल खड़े करती हैं. सबसे अहम सवाल ये है कि पुलिस लाईन के समीप ट्रैफिक व्यवस्था इतनी सख्त रहती है कि किसी भी वाहन की गति इतनी तेज नहीं हो सकती कि दुर्घटना होने पर व्यक्ति की मौत हो जाए और टक्कर मारने वाला वाहन चालक वाहन सहित भाग निकले और पुलिस की नजर उसपर न पड़े.
सबसे बड़ा सवाल: रंजीत वहां पहुंचे कैसे ?
रंजीत मिश्रा की पोस्टिंग बराकर में थी और उनका डेरा धनबाद में था. वह रोजाना धनबाद से बराकर ड्यूटी के लिए आते-जाते थे. बताया जा रहा है कि रंजीत खुद कोई वाहन नहीं चलाते थे. आवागमन के लिए वे सार्वजनिक परिवहन या पैदल चलने पर निर्भर रहते थे. ऐसे में सबसे अहम सवाल यही है कि बुधवार देर शाम वह धनबाद पुलिस लाइन के समीप मुख्य सड़क पर किस परिस्थिति में पहुंचे ? क्या वे पैदल वहां से गुजर रहे थे ? क्या किसी वाहन से उतरे थे ? क्या उन्हें किसी ने वहां छोड़ा था ? या फिर किसी दूसरी जगह से घायल अवस्था में लाकर सड़क पर छोड़ दिया गया ? इन सवालों का जवाब अभी सामने नहीं आया है.
भीड़ के बीच कही गई वह बात जांच की अहम कड़ी हो सकती है
घटना के बाद जब मेयर घायल रंजीत मिश्रा को अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे, उस समय मौके पर मौजूद भीड़ में कुछ लोगों के बीच कथित तौर पर चर्चा हो रही थी कि तीन-चार लोग वहां से भागे हैं. कुछ लोगों की ओर से टोटो से भागने की बात भी कही जा रही थी. यह प्रमाण मेयर संजीव सिंह के फेसबुक पोस्ट पर वायरल हो रहे वीडियो में मिल जायेंगे. अगर मौके पर मौजूद लोगों की यह बात सही है तो मामला केवल दुर्घटना तक सीमित नहीं रह जाता. आखिर वे तीन-चार लोग कौन थे ? वे वहां क्यों मौजूद थे ? क्या उनका रंजीत मिश्रा से कोई संबंध था ? क्या उन्होंने रंजीत के साथ मारपीट की थी ? और अगर वे वहां से भागे तो किस दिशा में गए ? इन सवालों का जवाब घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच से मिल सकता है.
सिर पर गंभीर चोट, लेकिन हादसा कैसे हुआ ?
रंजीत मिश्रा के सिर पर गंभीर चोट थी. सड़क दुर्घटना में इस तरह की चोट लगना संभव है, लेकिन दुर्घटना की परिस्थितियों की वैज्ञानिक जांच भी उतनी ही जरूरी है.
अगर यह सड़क हादसा था तो…
• किस वाहन ने उन्हें टक्कर मारी ?
• वाहन चालक कौन था ?
• घटना के बाद वाहन मौके से क्यों नहीं रुका ?
• क्या किसी वाहन के सीसीटीवी फुटेज या प्रत्यक्षदर्शी मिले हैं ?
• सड़क पर वाहन के टायर या दुर्घटना से जुड़े अन्य निशान मिले हैं ?
• रंजीत के कपड़ों और शरीर पर चोटों का पैटर्न क्या बताता है ?
• और अगर यह दुर्घटना नहीं थी तो सवाल और गंभीर हो जाता है कि रंजीत के साथ आखिर हुआ क्या था ?
• क्या किसी ने मारपीट कर सड़क पर फेंका ?
रंजीत मिश्रा के बारे में परिवार या परिचितों की ओर से किसी बड़ी दुश्मनी की जानकारी सामने नहीं आई है. यही बात इस मामले को और उलझाती है. जिस व्यक्ति का किसी से विवाद सामने नहीं आया, वह दिन के उजाले में ऐसे इलाके में गंभीर रूप से घायल कैसे हो गया, जहां आमतौर पर लोगों की आवाजाही रहती है ?
• क्या किसी विवाद के बाद उनके साथ मारपीट हुई ?
• क्या उन्हें किसी सुनसान स्थान पर ले जाया गया और वहां हमला करने के बाद सड़क पर छोड़ दिया गया ?
• या फिर वास्तव में यह किसी वाहन की टक्कर का मामला है ?
इनमें से किसी भी संभावना को जांच पूरी होने से पहले खारिज करना जल्दबाजी होगी.
मेयर की इंसानियत ने बचाई जांच की पहली कड़ी
इस पूरे घटनाक्रम में धनबाद के मेयर संजीव सिंह की भूमिका भी उल्लेखनीय रही. रास्ते से गुजरते समय घायल रंजीत मिश्रा को देखकर उन्होंने अपनी गाड़ी रोकी और बिना समय गंवाए उन्हें अस्पताल पहुंचाया. अगर उस समय घायल को अस्पताल पहुंचाने में और देरी होती तो शायद पुलिस और परिजनों के सामने घटनास्थल पर मौजूद शुरुआती परिस्थितियों की जानकारी भी अलग होती. लेकिन अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी धनबाद पुलिस की है.
पुलिस के सामने सिर्फ मौत नहीं, सवालों का भी जवाब तलाशने की चुनौती
रंजीत मिश्रा की मौत को केवल सड़क दुर्घटना मानकर फाइल बंद करना आसान रास्ता हो सकता है. लेकिन घटनास्थल की परिस्थितियां और मौके पर मौजूद लोगों की कथित बातचीत कई सवाल छोड़ती है. पुलिस को घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने होंगे. रंजीत की अंतिम लोकेशन, मोबाइल फोन की गतिविधियां, ड्यूटी से लौटने का पूरा रास्ता, जिन सार्वजनिक वाहनों से वह आमतौर पर सफर करते थे उनकी जानकारी और घटना के समय वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ करनी होगी. इसके साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण होगी. शरीर पर चोटों का स्वरूप यह तय करने में मदद कर सकता है कि चोटें सड़क दुर्घटना से आईं या किसी अन्य तरीके से.
अब असली सवाल यही है
• रंजीत मिश्रा सड़क दुर्घटना के शिकार हुए या किसी ने उन्हें घायल कर सड़क पर छोड़ दिया ?
• अगर दुर्घटना थी तो टक्कर मारने वाला वाहन और चालक कहां है ?
• अगर हमला हुआ तो हमलावर कौन थे और वारदात की वजह क्या थी ?
• और सबसे अहम सवाल- पुलिस लाइन जैसे व्यस्त इलाके में हुई इस घटना का सच क्या है ?
जेब में पेन, मोबाइल और बैग सुरक्षित, फिर हादसा कैसे ?
रंजीत मिश्रा के पास मौजूद सामान भी इस मामले को सामान्य सड़क दुर्घटना मानने पर सवाल खड़े करता है. घटना के बाद उनकी जेब में पेन मौजूद था, मोबाइल भी सुरक्षित था और बैग भी सही हालत में मिला. यानी प्रथमदृष्टया ऐसी कोई बात सामने नहीं आती कि घटना के दौरान उनके सामान को छीना गया हो. अगर यह महज सड़क दुर्घटना थी तो दुर्घटना की परिस्थितियां क्या थीं ? और अगर किसी के साथ विवाद या मारपीट हुई थी तो फिर उनका मोबाइल, बैग और अन्य सामान सुरक्षित कैसे रहा ?इन तमाम सवालों का जवाब सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल की लोकेशन और कॉल डिटेल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा घटनास्थल की फोरेंसिक जांच से मिल सकता है. फिलहाल इतना जरूर है कि जेब में पेन, सुरक्षित मोबाइल और सही-सलामत बैग इस मामले की जांच में सामान्य सड़क दुर्घटना से आगे भी संभावित परिस्थितियों को खंगालने की जरूरत को मजबूत करते हैं.
रंजीत मिश्रा की मौत का रहस्य तभी सुलझेगा, जब पुलिस घटना को सिर्फ एक दुर्घटना मानकर नहीं, बल्कि हर संभावित पहलू से जांच करेगी. फिलहाल एक रेलकर्मी की मौत अपने पीछे सवालों की लंबी फेहरिस्त छोड़ गई है. अब निगाहें धनबाद पुलिस की जांच पर हैं कि वह इन सवालों के जवाब तलाशती है या मामला महज सड़क दुर्घटना मानकर बंद कर दिया जाता है.

