आसनसोल: बच्चों को यौन अपराध और साइबर अपराध से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से श्री हरिहर बालिका विद्या मंदिर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों ने छात्राओं को POCSO कानून के साथ साइबर बुलिंग, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, ऑनलाइन दोस्ती, साइबर ग्रूमिंग और ऑनलाइन ठगी जैसे खतरों के प्रति सतर्क किया.


मुख्य वक्ता के रूप में महिला थाना प्रभारी स्नेहा नीता मंडल मौजूद रहीं. उनके साथ नियामतपुर फाड़ी प्रभारी उत्पल घोषाल, विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रूपाली कुमारी, शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्राएं उपस्थित रहीं.
असहज महसूस हो तो चुप न रहें
बच्चियों को समझाया गया कि अपने शरीर और व्यक्तिगत सीमाओं को लेकर सजग रहना बेहद जरूरी है. किसी व्यक्ति के स्पर्श या व्यवहार से असहज अथवा असुरक्षित महसूस होने पर चुप रहने के बजाय अभिभावक, शिक्षक या पुलिस जैसे भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी दें.
कार्यक्रम में बताया गया कि POCSO कानून 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है. बच्चों को यह संदेश भी दिया गया कि यदि किसी दूसरे बच्चे के साथ गलत होता दिखाई दे तो उसकी मदद करें और जिम्मेदार व्यक्ति तक इसकी सूचना पहुंचाएं.
ऑनलाइन दोस्ती में भी बरतें सावधानी
पुलिस अधिकारियों ने मोबाइल और सोशल मीडिया के इस्तेमाल में विशेष सावधानी बरतने को कहा. अनजान व्यक्ति से ऑनलाइन दोस्ती, निजी फोटो-वीडियो या व्यक्तिगत जानकारी साझा करने, पासवर्ड और OTP बताने तथा संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचने की सलाह दी गई.
छात्राओं को समझाया गया कि ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया पर सामने वाला व्यक्ति अपनी असली पहचान छिपा सकता है. किसी के दबाव या बहकावे में निजी तस्वीर अथवा वीडियो साझा करना गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है.
मुसीबत में चुप्पी नहीं, शिकायत जरूरी
कार्यक्रम का प्रमुख संदेश रहा कि किसी अपराध या ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना होने पर डरकर मामले को छिपाना नहीं चाहिए. बच्चों से तुरंत भरोसेमंद अभिभावक, शिक्षक अथवा पुलिस से मदद लेने की अपील की गई.
बच्चों की सहायता के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 उपलब्ध है. साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर की जा सकती है, जबकि वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 पर तत्काल सूचना दी जा सकती है.
कार्यक्रम के अंत में बच्चों से कहा गया कि वे डर के बजाय जागरूकता को अपनी ताकत बनाएं और जरूरत पड़ने पर अपने साथ-साथ दूसरे बच्चों की सुरक्षा के लिए भी आवाज उठाएं.

