आदित्यपुर: लगातार हो रही बारिश के कारण खरकई नदी में अचानक बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है. नदी का जलस्तर बढ़ने से आदित्यपुर के बाबाकुटी समेत कई तटीय इलाके जलमग्न हो गए हैं. बाबाकुटी क्षेत्र में 11 हजार केवीए का बिजली पोल और ट्रांसफार्मर भी पानी में डूब गया है. संभावित खतरे को देखते हुए कुलुपटांगा फीडर की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई है. फीडर बंद होने से बाबाकुटी समेत आसपास का बड़ा इलाका अंधेरे में डूब गया है.


खरकई नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है. कई इलाकों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल रहा है. प्रशासन और स्थानीय स्तर पर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है. नदी के किनारे और जलमग्न इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की गई है.

इधर, मौसम विभाग और जिला प्रशासन की ओर से भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है. लगातार बारिश के कारण आने वाले घंटों में नदियों के जलस्तर में और वृद्धि की आशंका बनी हुई है. वहीं ओडिशा के बैंगबिल डैम का फाटक खोले जाने की सूचना के बाद खरकई और स्वर्णरेखा नदी के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ गई है.
बिजली व्यवस्था पर भी उठे सवाल
बाढ़ के बीच बिजली आपूर्ति बंद होने के बाद विभाग की व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि अंडरग्राउंड केबलिंग के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद बारिश और बाढ़ की स्थिति में बिजली व्यवस्था प्रभावित हो रही है. लोगों का सवाल है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च कर बिजली व्यवस्था को सुरक्षित और आधुनिक बनाने का दावा किया गया है, तो फिर बाढ़ प्रभावित इलाकों में बिजली के पोल और ट्रांसफार्मर डूबने की स्थिति क्यों बनी.
2008 से तटीय इलाकों की सुरक्षा की मांग कर रहे पुरेंद्र
खरकई नदी की बाढ़ और कटाव से आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के तटीय इलाकों को बचाने की मांग वर्ष 2008 से उठाई जा रही है. नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष पुरेंद्र नारायण सिंह के नेतृत्व में आदित्यपुर-गम्हरिया विकास समिति के प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में कई बार राज्य सरकार के जल संसाधन विभाग और स्वर्णरेखा परियोजना के अधिकारियों से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा है.
समिति की ओर से तत्कालीन जल संसाधन मंत्री अन्नपूर्णा देवी, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री चंपाई सोरेन तथा समय-समय पर स्वर्णरेखा परियोजना के प्रशासक से मुलाकात कर तटीय इलाकों की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था की मांग की जा चुकी है.
पुरेंद्र नारायण सिंह के अनुसार खरकई नदी का जलस्तर बढ़ने अथवा बाढ़ आने की स्थिति में आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के कई तटीय इलाकों में पानी प्रवेश कर जाता है. इनमें आसंगी, बन्तानगर बस्ती के ए, बी और सी जोन, बाबाकुटी, वास्तु विहार, राधास्वामी, कुलुपटांगा, रायडीह बस्ती, राममड़ैया बस्ती, जयप्रकाश नगर, शांति नगर, हरिओम नगर, मांझी टोला, सालडीह बस्ती और बेल्डीह बस्ती प्रमुख हैं.
उन्होंने बताया कि वर्ष 2008 में आई बाढ़ के दौरान तटीय इलाकों में काफी नुकसान हुआ था. बरसात के मौसम में खरकई का जलस्तर बढ़ते ही इन इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच भय का माहौल बन जाता है.
सभी नालों पर स्लुईस गेट और नदी किनारे इंबैंकमेंट की मांग
पुरेंद्र नारायण सिंह ने बताया कि जल संसाधन विभाग की ओर से भाटिया बस्ती के पास खरकई नदी के किनारे स्लुईस गेट और इंबैंकमेंट बनाने का काम किया गया है. वहीं नगर निगम की ओर से मार्ग संख्या-7 के पास नाले पर स्लुईस गेट और इंबैंकमेंट का निर्माण कराया गया है.
उन्होंने झारखंड सरकार के जल संसाधन विभाग से मांग की है कि खरकई नदी से जुड़े शेष नालों पर भी स्लुईस गेट लगाए जाएं और नदी के किनारे इंबैंकमेंट का निर्माण कराया जाए. उनका कहना है कि इससे आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के तटीय इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों को खरकई नदी की बाढ़ से राहत मिल सकती है.
बाबाकुटी में बिजली बंद होने से बढ़ी परेशानी
फिलहाल खरकई नदी में आई बाढ़ के कारण बाबाकुटी का बिजली पोल और ट्रांसफार्मर पानी में डूब गया है. सुरक्षा कारणों से कुलुपटांगा फीडर बंद किए जाने के बाद कई इलाके अंधेरे में हैं. लगातार बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटीय इलाकों में स्थिति पर प्रशासन और संबंधित विभागों की नजर बनी हुई है.
स्थानीय लोगों की मांग है कि बाढ़ से प्रभावित इलाकों में तत्काल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए और भविष्य में खरकई नदी की बाढ़ से स्थायी बचाव के लिए स्लुईस गेट तथा इंबैंकमेंट का काम पूरा कराया जाए.

