आदित्यपुर: नगर निगम में पिछले करीब 20 दिनों से ठप पड़े डोर-टू-डोर कचरा उठाव और सफाई व्यवस्था को लेकर अब सियासत गरमा गई है. वार्ड 17 की पार्षद नीतू शर्मा के आंदोलन को आधे से अधिक पार्षदों का समर्थन मिलने के बाद निगम की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है. डिप्टी मेयर भी आंदोलन के समर्थन में निगम कार्यालय पहुंचे और पार्षदों की मांग का समर्थन किया. हालांकि कुछ पार्षद इस पूरे घटनाक्रम से नाराज नजर आए और उन्होंने आरोप लगाया कि जब उनके वार्ड में सफाई की बारी आई तो राजनीति शुरू कर दी गई है. मगर सवाल राजनीति का नहीं बल्कि उसके आगे का है. क्या पिछले बीस दिनों से उनके वार्ड में सफाई और डोर- टू- डोर कचरा उठाव हुआ ? जब पार्षद नीतू शर्मा ने मोर्चा खोल दिया तब आनन- फानन में निगम प्रशासन हरकत में आया और कचरा उठाव में लगे गाड़ियों को भेजा गया क्या ये सही है ?



गुरुवार को पार्षद नीतू शर्मा निगम कार्यालय पहुंचीं और कचरा उठाव में लगे वाहनों को रोककर विरोध जताया. उन्होंने आरोप लगाया कि निगम के कुछ चुनिंदा वार्डों में कचरा उठाया जा रहा है, जबकि अधिकांश वार्डों की जनता पिछले कई दिनों से गंदगी के बीच रहने को मजबूर है. नीतू शर्मा ने कहा कि जनता टैक्स इसलिए देती है ताकि उसे सफाई, पानी, स्ट्रीट लाइट और अन्य मूलभूत सुविधाएं मिल सकें. लेकिन निगम की कार्यप्रणाली ऐसी है कि जनता परेशान है और जिम्मेदार लोग जवाब देने को तैयार नहीं हैं. उन्होंने रात में कराए जा रहे सफाई अभियान को भी दिखावा करार दिया.
आंदोलन में डिप्टी मेयर भी उतरे
नीतू शर्मा के विरोध के बीच डिप्टी मेयर के भी धरने में शामिल होने से मामला और गंभीर हो गया. जैसे- जैसे समय बीतता गया वार्ड 1, 2, 4, 6, 7, 11, 15, 18, 19, 22, 23 और 30 के पार्षद भी मौके पर पहुंचे और निगम के विधि- व्यवस्था पर सवाल उठाया. इससे साफ है कि सफाई व्यवस्था को लेकर निगम के निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच भी असंतोष बढ़ रहा है.
वहीं, कुछ पार्षदों ने आंदोलन की टाइमिंग और तरीके पर सवाल उठाए. उनका आरोप है कि जब उनके वार्ड में सफाई की समस्या सामने आई और सफाई की बारी आई, तब इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया गया. आरोप है कि
मेयर पर भी उठे सवाल
पूरे घटनाक्रम के बीच मेयर पर भी विवाद को बढ़ावा देने के आरोप लग रहे हैं. हालांकि दूसरी ओर मेयर खुद आंदोलनकारी पार्षदों के साथ धरने पर बैठे नजर आए. ऐसे में निगम की राजनीति में एक अजीब स्थिति बन गई है, जहां विरोध भी हो रहा है और विरोध के बीच नेतृत्व की मौजूदगी भी दिखाई दे रही है.
पांच महीने में सफाई व्यवस्था क्यों नहीं सुधरी ?
पार्षद नीतू शर्मा ने कहा कि नगर निगम का नया बोर्ड बने करीब पांच महीने हो चुके हैं. हर बोर्ड बैठक में सफाई कर्मियों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव आता है, लेकिन कार्रवाई कागजों से आगे नहीं बढ़ती. इसका सीधा असर जनता पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि बुधवार को निगम कार्यालय के घेराव की चेतावनी देने के बाद कुछ कचरा वाहनों को वार्डों में भेजा गया. उन्होंने साफ कहा कि सफाई व्यवस्था में भेदभाव किसी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा. “एक आंख में काजल और दूसरी आंख में सूरमा नहीं चलेगा.”
नीतू शर्मा ने कहा कि जिस जनता के टैक्स से निगम चलता है, उसी जनता को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलना गंभीर सवाल है. उन्होंने यहां तक कहा कि अगर उनके वार्ड की जनता के टैक्स का उचित हिस्सा विकास और रखरखाव के लिए उपलब्ध कराया जाए तो वे अपने स्तर से सफाई, चापाकल और स्ट्रीट लाइट जैसी समस्याओं का समाधान कराने को तैयार हैं.
बंद कमरे में गुप्तगू उसके बाद नगर आयुक्त कक्ष में बवाल
उधर हंगामा के बाद सभी पार्षद, डिप्टी मेयर और मेयर बंद कमरे में गुप्तगू करने पहुंच गए इस दौरान मिडिया के प्रवेश पर रोक लगा दी गई. करीब एक घंटे तक गुप्तगू करने के बाद सभी जनप्रतिनिधि नगर आयुक्त के कक्ष में घुस गए और हंगामा करने लगे. अब सवाल सिर्फ 20 दिनों से बंद कचरा उठाव का नहीं है. सवाल यह भी है कि आखिर नगर निगम में सफाई व्यवस्था को लेकर पार्षदों के बीच ही मतभेद क्यों बढ़ रहे हैं. और अगर मेयर आंदोलनकारी पार्षदों के साथ धरने पर बैठे हैं, तो फिर निगम की व्यवस्था की जिम्मेदारी आखिर किसकी है ? कुल मिलाकर आदित्यपुर में कचरे का संकट अब सड़क से निकलकर नगर निगम की राजनीति के केंद्र में पहुंच चुका है. जिसमें मेयर रिंग मास्टर की भूमिका निभा रहे हैं. अब देखना यह दिलचस्प होगा कि इस ड्रामा का अंत क्या होता है.





