रांची: कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव और पश्चिम बंगाल की सह प्रभारी अंबा प्रसाद के धुर्वा स्थित सरकारी आवास को खाली कराने की प्रशासनिक कार्रवाई शनिवार को सियासी विवाद में बदल गई. प्रशासन ने HEC परिसर स्थित सरकारी आवास संख्या F-44 को खाली कराने की प्रक्रिया पूरी करते हुए उसे सील कर दिया. इसके विरोध में पूर्व विधायक अंबा प्रसाद उसी आवास के बाहर टेंट लगाकर धरने पर बैठ गईं.


मामले में सबसे दिलचस्प राजनीतिक स्थिति यह है कि अंबा प्रसाद ने कार्रवाई को लेकर अपनी ही सरकार पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि दीपावली की पूर्व संध्या पर उन्हें सरकारी आवास से बाहर कर दिया गया, जबकि रांची में कई अन्य पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री अब भी सरकारी आवासों में रह रहे हैं.
अंबा की गैरमौजूदगी में पहुंचा प्रशासन
शनिवार को जिला प्रशासन की टीम मजिस्ट्रेट मो. जफर हसनात की मौजूदगी में आवास खाली कराने पहुंची थी. उस समय अंबा प्रसाद अथवा उनके परिवार का कोई सदस्य वहां मौजूद नहीं था. इसके बाद केयरटेकर की मौजूदगी में आवास खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की गई.
प्रशासन के मुताबिक यह आवास अंबा प्रसाद को विधायक रहने के दौरान आवंटित किया गया था. वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में उनकी हार के बाद आवास खाली किया जाना था. प्रशासन का कहना है कि पिछले वर्ष ही यह आवास एक IAS अधिकारी के नाम आवंटित किया जा चुका है.
प्रशासन का दावा- कई नोटिस दिए, अंबा बोलीं- मुझे मिला ही नहीं
मजिस्ट्रेट मो. जफर हसनात के मुताबिक अंबा प्रसाद को आवास खाली करने के लिए कई बार नोटिस दिया गया था. अंतिम नोटिस 2 नवंबर को जारी किया गया और इसकी जानकारी व्हाट्सएप के माध्यम से भी भेजी गई, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला.
दूसरी ओर अंबा प्रसाद ने प्रशासन के इस दावे पर सवाल उठाया है. उनका कहना है कि उन्हें आवास खाली करने का कोई नोटिस नहीं मिला. ऐसे में नोटिस की तामील को लेकर प्रशासन और पूर्व विधायक के दावे आमने-सामने हैं.
‘अपनी ही सरकार ने दीपावली से पहले बेघर कर दिया’
आवास सील किए जाने के बाद अंबा प्रसाद ने बाहर ही टेंट लगाकर धरना शुरू कर दिया. उन्होंने कार्रवाई में पक्षपात का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि जब रांची में कई पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री सरकारी आवासों में रह रहे हैं तो कार्रवाई केवल उनके खिलाफ क्यों की गई.
अंबा प्रसाद ने अपनी और परिवार के सदस्यों की अनुपस्थिति में आवास खाली कराए जाने पर भी आपत्ति जताई. उनका कहना है कि दीपावली जैसे त्योहार से ठीक पहले इतनी जल्दबाजी में कार्रवाई करने की क्या आवश्यकता थी.
सरकारी आवास से शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक मुद्दा
अंबा प्रसाद कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव हैं और झारखंड में कांग्रेस सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है. ऐसे में अपनी ही गठबंधन सरकार के दौरान एक कांग्रेस नेता द्वारा प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाए जाने से मामला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो गया है.
अब बड़ा सवाल यह है कि यदि अन्य पूर्व विधायक या पूर्व मंत्री भी निर्धारित अवधि समाप्त होने के बावजूद सरकारी आवासों में रह रहे हैं तो उनके मामलों में प्रशासन की क्या नीति है. वहीं अंबा प्रसाद को जारी किए गए नोटिस और उसकी तामील को लेकर दोनों पक्षों के विरोधाभासी दावों की स्थिति भी स्पष्ट होना बाकी है.

