जामताड़ा: आयुर्वेद के जनक एवं आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की जयंती के अवसर पर आरोग्य भारती, एनसीसी, डीएवी एवं ग्रीन जामताड़ा के संयुक्त तत्वावधान में वनस्पति उद्यान में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में धार्मिक आस्था, भारतीय आयुर्वेदिक परंपरा और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम देखने को मिला. इस अवसर पर भगवान धन्वंतरि की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ ‘एक पौधा मां के नाम’ अभियान के तहत विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाकर प्रकृति के संरक्षण का संदेश दिया गया.


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का विधिवत शुभारंभ किया. इसके उपरांत उन्होंने भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना कर क्षेत्रवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि एवं मंगलमय जीवन की कामना की. उपस्थित लोगों ने भी भगवान धन्वंतरि के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हुए आयुर्वेद की समृद्ध भारतीय परंपरा को आगे बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प लिया.
पौधरोपण से दिया प्रकृति और मातृत्व के सम्मान का संदेश
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण ‘एक पौधा मां के नाम’ अभियान के तहत आयोजित पौधरोपण अभियान रहा. पौध प्रहरी के नेतृत्व में वनस्पति उद्यान में बरगद, पीपल, तुलसी, छतनी एवं नीम के पौधे लगाए गए. इन पौधों के चयन के पीछे भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और औषधीय महत्व की भावना जुड़ी रही. पौधरोपण के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जिस प्रकार मां अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है, उसी प्रकार पेड़-पौधे भी पूरी मानवता का जीवन संवारते हैं. इसलिए पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना भी प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है.
आयुर्वेद और वनस्पतियों के महत्व पर दिया जोर
वक्ताओं ने कहा कि भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का प्रवर्तक और चिकित्सा परंपरा का आराध्य देव माना जाता है. भारतीय आयुर्वेद में वनस्पतियों का विशेष स्थान है. प्रकृति ने मानव जीवन को स्वस्थ रखने के लिए अनेक औषधीय वनस्पतियां प्रदान की हैं. नीम, तुलसी सहित कई पौधे पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं. ऐसे में वनस्पति उद्यान को संरक्षित करना और अधिक से अधिक औषधीय पौधे लगाना समाज के लिए उपयोगी पहल है.
उन्होंने कहा कि आज बढ़ते प्रदूषण, घटते हरित क्षेत्र और पर्यावरणीय असंतुलन के दौर में पौधरोपण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा दायित्व है. प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने जीवन में एक पौधा लगाकर उसकी नियमित देखभाल करने का संकल्प ले, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है.
कृष्ण गोशाला के सचिव समेत कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर कृष्ण गोशाला के सचिव मिंटू अग्रवाल, आरोग्य भारती के अभिमन्यु साव, पौध रक्षक जयंत तथा डीएवी के एनसीसी के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे. एनसीसी कैडेटों ने पौधरोपण अभियान में उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई. कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, आयुर्वेदिक ज्ञान और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का अवसर प्रदान किया.
आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ समाज की कल्पना स्वस्थ पर्यावरण के बिना अधूरी है. भगवान धन्वंतरि की आराधना के साथ पौधरोपण कर आयोजकों ने स्वास्थ्य, प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया. वनस्पति उद्यान में लगाए गए पौधे आने वाले समय में हरियाली के साथ पर्यावरण संरक्षण के इस संकल्प की याद भी दिलाते रहेंगे.
रिपोर्ट: मनीष बरनवाल

