जामताड़ा: गोविंदपुर- साहेबगंज हाईवे पर रात के अंधेरे में संदिग्ध कोयला लदे ट्रकों की आवाजाही का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है. उपायुक्त आलोक कुमार द्वारा जांच के आदेश दिए जाने के बाद भाजपा ने भी कथित अवैध कोयला कारोबार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. भाजपा प्रवक्ता सह पूर्व मंत्री रणधीर कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता कर नारायणपुर, जामताड़ा और मिहिजाम थाना क्षेत्रों से बंगाल एवं बिहार की ओर हो रही कथित कोयला ढुलाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं.


रणधीर सिंह ने आरोप लगाया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में कोयला लदे ट्रक विभिन्न मार्गों से गुजर रहे हैं, लेकिन पुलिस और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं. उन्होंने प्रशासन और सरकार पर कथित मिलीभगत का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की. साथ ही चेतावनी दी कि यदि अवैध कोयला कारोबार पर रोक नहीं लगी तो भाजपा चरणबद्ध आंदोलन करेगी. इसके तहत थाना घेराव और संदिग्ध कोयला लदे ट्रकों को पकड़कर प्रशासन के हवाले करने की बात कही गई है.
तीन थाना क्षेत्रों से गुजरते हैं दर्जनों ट्रक, पुलिस को भनक तक नहीं?
इस पूरे प्रकरण में इंडिया न्यूज वायरल ने भी कुछ बेहद अहम सवाल उठाए हैं. सवाल यह है कि धनबाद की ओर से आने वाले कोयला लदे ट्रक नारायणपुर थाना क्षेत्र के पांडेयडीह में प्रवेश करते हैं. इसके बाद जामताड़ा थाना क्षेत्र से गुजरते हुए मिहिजाम पहुंचते हैं और फिर मिहिजाम थाना क्षेत्र से बंगाल की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं. स्थानीय स्तर पर रात के समय इस मार्ग से दर्जनों की संख्या में कोयला लदे ट्रकों की आवाजाही का दावा किया जा रहा है.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी गतिविधि के बावजूद तीनों थाना क्षेत्रों की पुलिस को इसकी जानकारी कैसे नहीं है? तीनों थाना प्रभारियों की ओर से अपने-अपने क्षेत्र में कोयला लदे ट्रकों के परिवहन से अनभिज्ञता जताए जाने की बात सामने आ रही है. जबकि प्रत्येक थाना क्षेत्र में बीट पदाधिकारी और ग्रामीण स्तर पर चौकीदारों की व्यवस्था छोटी-बड़ी गतिविधियों की सूचना पुलिस तक पहुंचाने के लिए होती है.
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि यदि रात के अंधेरे में लगातार दर्जनों ट्रक गुजर रहे हैं तो क्या स्थानीय पुलिस की गश्ती व्यवस्था को इसकी जानकारी नहीं मिलती? क्या बीट पदाधिकारियों और चौकीदारों की सूचना प्रणाली निष्क्रिय है या फिर इस पूरे परिवहन की निगरानी में कहीं कोई गंभीर चूक हो रही है?
पत्रकार और थाना प्रभारी की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
इस मामले में स्थानीय स्तर पर जामताड़ा जिले के एक पत्रकार और एक थाना प्रभारी की कथित भूमिका को लेकर भी चर्चा और आरोप सामने आ रहे हैं. कुछ लोगों द्वारा इन्हें इस पूरे नेटवर्क का कथित किंगपिन बताए जाने की बात कही जा रही है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी की भूमिका जांच में प्रमाणित हुई है. ऐसे में संबंधित व्यक्तियों की पहचान उजागर करने अथवा उन्हें दोषी ठहराने से पहले निष्पक्ष जांच जरूरी है.
ट्रक पकड़े जाने की घटनाओं ने बढ़ाया संदेह
गौरतलब है कि इससे पहले चित्तरंजन स्टेशन के समीप धनबाद नंबर का ओवरलोड कोयला लदा ट्रक जाम में फंसने और पांडेयडीह के पास एक ट्रक पर कार्रवाई की खबर सामने आ चुकी है. इन घटनाओं के बाद रात के समय होने वाले कोयला परिवहन को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल और गहरे हुए हैं.
जांच में इन बिंदुओं की पड़ताल जरूरी
डीसी के जांच आदेश के बाद अब प्रशासन की कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं. जांच में केवल ट्रकों की आवाजाही की गिनती पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की पड़ताल जरूरी है.
* कोयले का वास्तविक स्रोत और वैध खरीद-बिक्री के दस्तावेज.
* परिवहन चालान, ई-वे बिल और अन्य आवश्यक कागजात.
* ट्रकों का रजिस्ट्रेशन, ओवरलोडिंग और निर्धारित परिवहन मार्ग.
* नारायणपुर से मिहिजाम तक रास्ते में पड़ने वाले थाना क्षेत्रों की निगरानी.
* रात के समय तैनात पुलिस गश्ती दल और बीट पदाधिकारियों की गतिविधियां.
* संबंधित विभागों के अधिकारियों की भूमिका और संभावित लापरवाही.
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि रात में कोयला लदे ट्रक किस रास्ते से गुजर रहे हैं, बल्कि यह भी है कि इतनी लंबी दूरी तय करने के दौरान उनकी निगरानी करने वाली व्यवस्था आखिर क्या कर रही है ? भाजपा की आंदोलन की चेतावनी और डीसी के जांच आदेश के बीच प्रशासन के सामने पारदर्शी जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती है. जांच में यदि कोई संगठित अवैध नेटवर्क सामने आता है तो उसके जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी होगी.
रिपोर्ट: मनीष बरनवाल

